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ट्रंप से PAK ने की मिन्नत: अमेरिका ने रोका प्रोजेक्ट फ्रीडम; डोनाल्ड बोले- ईरान की नाकाबंदी जारी रहेगी

Wed, 06 May 2026 06:37 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को रोक दिया है। यह मिशन हॉर्मुज जलमार्ग में फंसे जहाजों को निकालने के लिए था। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौते की बातचीत चल रही है, इसलिए यह फैसला लिया गया। हालांकि, ईरान की नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी।
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होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा एलान - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को कुछ समय के लिए रोकने का एलान किया है। यह मिशन हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए शुरू किया गया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही जहाजों को निकालने का काम रोका गया है, लेकिन ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी पहले की तरह पूरी ताकत के साथ जारी रहेगी।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि यह फैसला पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों की अपील पर लिया गया है। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में उन्हें बड़ी सफलता मिली है। इसके अलावा, ईरानी प्रतिनिधियों के साथ एक पूर्ण और अंतिम समझौते की दिशा में अच्छी प्रगति हुई है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।

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इस रोक का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि क्या तेहरान और वॉशिंगटन के बीच समझौता फाइनल होकर साइन हो सकता है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि समझौते की संभावना को देखते हुए आपसी सहमति से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' यानी जहाजों की आवाजाही को केवल थोड़े समय के लिए रोका गया है ताकि बातचीत को अंजाम तक पहुंचाया जा सके।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ही इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया भर के देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी। इसके बाद सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने यह ऑपरेशन शुरू कर दिया था। इस मिशन के लिए अमेरिकी सेना ने बड़ी तैयारी की थी। इसमें मिसाइल नष्ट करने वाले युद्धपोत, 100 से ज्यादा विमान और ड्रोन शामिल किए गए थे। साथ ही, 15,000 सैनिकों को भी इस काम में लगाया गया था। यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए था।

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