ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क
- फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- व्हाइट हाउस
विगत सात मई को पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद 10 मई की शाम पांच बजे से दोनों देशों की सेनाओं ने गोलाबारी रोकने और संघर्ष थामने पर सहमति व्यक्त की। भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य महानिदेशक (डीजीएमओ) स्तर पर सीधी बातचीत हुई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोनों देशों का तनाव घटाने में अपनी भूमिका को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं। भारत की तरफ से दो-टूक खंडन के बावजूद उन्होंने बीते 21 दिनों में करीब 10 बार ऐसे बयान दिए हैं, जिसमें ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने दोनों देशों का युद्ध रोका।
भारत-पाकिस्तान तनाव पर विदेश मंत्री डॉ जयशंकर का जवाब
लगातार जारी ट्रंप की बयानबाजी के बीच यह जिक्र करना भी अहम है कि भारत ने अपनी विदेश नीति को स्पष्ट कर दिया है। खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बीते 22 मई को दो टूक लहजे में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ सैन्य
संघर्ष खत्म करने को लेकर सहमति बनाने में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। दोनों देशों के बीच सहमति सीधी बातचीत के बाद बनी है। उन्होंने यह बात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर कही कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच सहमति बनाने में भूमिका निभाई थी।
ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फिर लिया भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने का श्रेय
- फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- व्हाइट हाउस
अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान को लड़ने से रोका..
व्हाइट हाउस की तरफ से जारी वीडियो में ओवल ऑफिस में मौजूद ट्रंप ने कहा, 'हमने भारत और पाकिस्तान को लड़ने से रोका। मेरा मानना है कि यह परमाणु आपदा में बदल सकता था। मैं भारत और पाकिस्तान के नेताओं के साथ-साथ अपने लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं।'
भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने को लेकर बीते 21 मई को ट्रंप ने लिया था श्रेय (फाइल)
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जो एक-दूसरे पर गोली चला रहे हों, अमेरिका उनसे व्यापार नहीं...
बकौल डोनाल्ड ट्रंप, हम व्यापार की बात करते हैं... हम कहते हैं कि हम उन लोगों के साथ व्यापार नहीं कर सकते जो एक-दूसरे पर गोली चला रहे हों और परमाणु हथियारों का उपयोग करने की कगार पर खड़े हों। ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के किसी भी नेता का नाम लिए बिना कहा, 'वे उन देशों के महान नेता हैं, उन्होंने परिस्थितियों को समझा और दोनों के सहमत होने के बाद यह सब बंद हो गया। हम दूसरों को लड़ने से रोक रहे हैं।' बता दें कि इससे पहले भी ट्रंप बीते 21 मई को कह चुके हैं कि उन्होंने अपने हस्तक्षेप और व्यापारिक पहलू का जिक्र कर भारत-पाकिस्तान के संघर्ष को और गंभीर होने से रोका।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फाइल)
- फोटो : PTI
अमेरिकी सेना की ताकत बताने से भी नहीं चूके ट्रंप
अपने बयान के अंत में ट्रंप अमेरिकी सेना की क्षमता को रेखांकित करने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा, 'हम किसी से भी बेहतर तरीके से लड़ सकते हैं, हमारे पास दुनिया की सबसे महान सेना है। हमारे पास दुनिया के सबसे महान नेता हैं।' यह भी चौंकाने वाला है कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी व्यापार अदालत में भी भारत पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया था। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए ट्रंप के टैरिफ पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में एक
संघीय अपील कोर्ट ने ट्रंप को राहत दी और कहा कि टैरिफ की वसूली जारी रहेगी।
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डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क (फाइल)
- फोटो : PTI
एलन मस्क के साथ दोस्ती कायम रहेगी
ट्रंप के साथ ओवल ऑफिस में अरबपति उद्योगपति एलन मस्क भी मौजूद रहे, जिन्होंने DOGE में पद छोड़ दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही मस्क अलग हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों की दोस्ती कायम रहेगी। बता दें कि एलन मस्क ने 28 मई को डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार का पद छोड़ दिया।
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व्हाइट हाउस में एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप (फाइल)
- फोटो : एक्स/एलन मस्क
मस्क ने शीर्ष सलाहकार के रूप में अपनी सरकारी भूमिका छोड़ी
अमेरिकी राष्ट्रपति से अलग होने के बाद मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन में योगदान का अवसर देने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आभार भी प्रकट किया था। मस्क ने कहा कि वे शीर्ष सलाहकार के रूप में अपनी सरकारी भूमिका छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, संघीय नौकरशाही को कम करने और उसमें सुधार लाने का अवसर देने के लिए वे राष्ट्रपति को धन्यवाद देना चाहते हैं।
बीते 12 मई को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान का अंश
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भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने का श्रेय लेने की जिद...
बता दें कि भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते 21 दिनों की अवधि में लगभग 9 मौकों पर खुद ऐसे बयान दिए हैं, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर भारत-पाकिस्तान तनाव कम करने का श्रेय लिया है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी और
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन भी इस बात को लेकर उनकी आलोचना कर चुके हैं कि वे श्रेय लेने का कोई मौका चूकना नहीं चाहते।
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