अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता ने बेनतीजा रहने की दो मुख्य वजहें थी। इनमें पहली तेहरान का परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह से खत्म करने पर सहमत न होना था। वहीं, दूसरी होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को खत्म करने की थी। इन दोनों ही शर्तों पर ईरान राजी नहीं हुआ था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष खत्म होने के बहुत करीब है। उन्होंने कहा कि तेहरान एक समझौते पर पहुंचने के लिए उत्सुक है, जबकि पश्चिम एशिया के विभिन्न मोर्चों पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
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फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष में अपनी कार्रवाइयों का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि उनके निर्णायक हस्तक्षेप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका।
दखल न देता, तो ईरान के पास होते परमाणु हथियार : ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "मुझे दखल देना पड़ा, क्योंकि अगर मैंने ऐसा नहीं किया होता, तो इस समय ईरान के पास परमाणु हथियार होता। और अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो आप वहां हर किसी को 'सर' कहकर बुला रहे होते। और आप ऐसा नहीं चाहेंगे।"
ईरान युद्ध के खात्मे पर क्या बोले ट्रंप?
जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्ध खत्म हो गया है, तो ट्रंप ने संकेत दिया कि दुश्मनी निकट भविष्य में समाप्त हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि घटनाक्रम अभी भी तेजी से बदल रहा हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह लगभग समाप्त हो गया है। अगर मैं अभी सब कुछ छोड़ दूं, तो उन्हें उस देश को फिर से बनाने में 20 साल लगेंगे। हम देखेंगे कि क्या होता है। मुझे लगता है कि वे बहुत बुरी तरह से समझौता करना चाहते हैं।"
जल्द फिर से वार्ता शुरू होने की अटकलें
एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने सुझाव दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जल्द ही फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' को बताया कि पाकिस्तान में अगले कुछ दिनों में वार्ता का एक नया दौर हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पहले की चर्चाओं से कोई सफलता नहीं मिली थी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने हुए थे।