व्हाइट हाउस ने शनिवार (स्थानीय समय) को इस बात से इनकार कर दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति माइक पेंस को अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों को मारने के लिए रूस द्वारा इनाम की पेशकश की जानकारी दी गई थी। दरअसल, खुफिया निष्कर्षों में सामने आया है कि एक रूसी सैन्य इकाई ने गुप्त रूप से तालिबान को अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों को मारने के लिए इनाम की पेशकश की थी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कायले मैकनी ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका को हर रोज हजारों खुफिया रिपोर्ट मिलती हैं और वे सभी सख्त जांच के अधीन हैं।
'न्यूयॉर्क टाइम्स' (एनवाईटी) ने शुक्रवार को एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें उसने सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप को एक खुफिया रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि मॉस्को अफगानिस्तान में तालिबान को अमेरिकी सैनिकों को मारने के लिए इनाम दे सकता है। एनवाईटी ने कहा कि ट्रंप इस रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में विफल रहे।
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मैकनी ने कहा कि व्हाइट हाउस नियमित रूप से खुफिया या आंतरिक विचार-विमर्श पर टिप्पणी नहीं करता है। उन्होंने कहा कि सीआईए के निदेशक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, और चीफ ऑफ स्टाफ सभी इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि कथित रूसी इनाम की खुफिया जानकारी के बारे में न तो राष्ट्रपति और न ही उपराष्ट्रपति को सूचित किया गया था।
उन्होंने आगे कहा कि उनका बयान कथित खुफिया जानकारी की योग्यता को लेकर नहीं बोलता है लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स का गलत लेख यह सुझाव दे रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस मामले पर जानकारी दी गई थी।
तालिबान ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की हत्याओं में रूस की कथित भूमिका वाली रिपोर्टों का भी खंडन किया है। फरवरी में, अमेरिका और तालिबान ने लगभग दो दशकों के सशस्त्र संघर्ष और उग्रवाद के बाद अफगानिस्तान में सुलह प्रक्रिया शुरू करने के लिए कई दौर की बातचीत के बाद शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।