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डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'तख्तापलट' की आशंका, जनरल माइली बोले- 'किसी तानाशाह के प्रति नहीं है सेना की वफादारी'

Sat, 14 Nov 2020 02:51 AM IST
Kuldeep Singh वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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Donald trump and joe biden - फोटो : ANI
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पीछे छोड़ते हुए डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन को जीत मिली है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के नतीजे को मामने से इनकार कर दिया है और अब हालात ऐसे पैदा हो चुके हैं कि डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा 'तख्तापलट' करने की आशंका तक जताई जा रही है। अमेरिका सेना के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल मार्क माइली ने कहा है कि सेना केवल किसी राजा-रानी या तानाशाह की नहीं है बल्कि देश के संविधान की के अनुसार अपने कार्य करती है और सेना संविधान की कसम खाती है। उन्होंने कहा कि सेना का हर जवान खुद से ज्यादा संविधान की रक्षा करेगा।

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पेंटागन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किए बड़े बदलाव
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में पेंटागन में ताबड़तोड़ और अहम बदलाव करते हुए रक्षामंत्री मार्क एस्पर को हटा दिया और फिर अपने तीन वफादारों को उन अहम पदों पर नियुक्त किया है। इसके बाद से ही अब ऐसी अटकलें लगने लगीं हैं कि पता नहीं डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के आखिरी दो हफ्तों में क्या कर सकते हैं, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि, इसका कोई ठोस आधार नहीं है और जनरल मार्क माइली ने साफ किया है कि किसी भी हालत में ट्रंप को सेना की कोई मदद नहीं मिलेगी।
 


ट्रंप बोले- सेना को नहीं करना फैसला
डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस से कहा है कि चुनाव को लेकर किसी विवाद की स्थिति में समाधान देश की अदालत और संसद को करना होगा, सेना को नहीं। उन्होंने आगे कहा कि सेना के सदस्यों को चुनाव के बाद सत्ता से जुड़े मामलों में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए। गौरतलब है कि ट्रंप रक्षामंत्री मार्क एस्पर से काफी समय से नाराज थे। खासकर जून में जब अमेरिका में जनआंदोलन के दौरान सेना के इस्तेमाल की डोनाल्ड ट्रंप की मर्जी पर मार्क एस्पर ने असहमति जताई थी।

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अब क्या करेंगे ट्रंप?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस रुख से अब इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पार्टी के नेता सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी पिछले दिनों कहा था, 'ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के लिए आसानी से सत्ता हस्तांतरण होगा।' उधर, अटार्नी जनरल विलियम बार ने भी संघीय अभियोजकों से कहा है कि वे राष्ट्रपति चुनावों में हुई धांधली की जांच शुरू करें। सत्ता एक बार फिर से पाने के लिए ट्रंप प्रशासन के इस तमाम दांवपेच अपनाने के बाद भी अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के पास अब दोबारा राष्ट्रपति बनने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है। अब उन्हें अपनी हार स्वीकार कर लेनी चाहिए।

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