भारी विरोध एवं कोर्ट की दखल के बाद ट्रंप प्रशासन ने फैसला किया है कि वह ऑनलाइन क्लास करने वाले विदेशी छात्रों पर किसी भी तरह का वीजा प्रतिबंध नहीं लगाएगा। बता दें कि अमेरिका ने 6 जुलाई को ऐसे छात्रों से छात्र वीजा वापस लेने की घोषणा की थी जिनकी क्लास कोरोना के कारण केवल ऑनलाइन मॉडल पर हो रही थी।
Trump administration rescinds order denying foreign students US visas, says judge: AFP news agency
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी छात्रों का वीजा ऑनलाइन कक्षाओं के चलते प्रतिबंधित करने के फैसले की तीखी आलोचना के बीच देश के 17 राज्यों ने इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे को गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट समेत एक दर्जन से ज्यादा शीर्ष अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भी समर्थन दिया और मुकदमे में शामिल होने की घोषणा की थी।
कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनोइस, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यूजर्सी, न्यू मैक्सिको, ओरेगन, पेंसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, वरमोंट, वर्जीनिया, विस्कॉन्सिन राज्यों के अटॉर्नी जनरलों द्वारा भी मुकदमा दायर की गई थी। नई वीजा नीति के विरोध में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और एमआईटी के साथ 60 से भी ज्यादा विश्वविद्यालयों ने भी अदालत का रुख किया।
अमेरिका के 17 राज्यों ने इस तर्क का हवाला देकर मुकदमा दर्ज कराया कि ट्रंप प्रशासन के नए नियम देश में स्वास्थ्य आपातकाल (महामारी) के दौरान 13 मार्च को जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हैं। इन नियमों के तहत स्कूलों और कॉलेजों के साथ दूसरे संस्थानों को यह छूट दी गई थी कि एफ-1 या एम-1 वीजाधारक महामारी के दौरान ऑनलाइन क्लास कर सकते हैं। अदालत में दायर मुकदमे में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला देश को आर्थिक तौर भी प्रभावित करेगा, क्योंकि अभी विदेशी छात्र अमेरिका में आते हैं और पढ़ाई के बाद वे यहीं कई क्षेत्रों में काम करते हैं। इस फैसले से अर्थव्यवस्था कमजोर होगी।