पहली बार ब्रिटेन के बायोबैंक अध्ययन से पता चला है कि सप्ताह में 150-300 मिनट की साधारण या 75-150 मिनट की भारी कसरत दिल को दुरुस्त बनाए रखती है। 94 हजार वयस्कों पर छह वर्ष तक किए गए अध्ययन के नतीजे शनिवार को अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के शीर्ष जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित हुए। हालांकि, एएचए की तरफ से वयस्कों को सप्ताह में 75 मिनट भारी या 150 मिनट साधारण कसरत की सलाह दी जाती है। 75 से 150 मिनट कसरत से हार्ट फेल का खतरा 66 फीसदी कम होता है।
स्कॉटलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लास्गो में जन स्वास्थ्य के व्याख्याता व शोध पत्र के सह-लेखक डॉ. फ्रेडरिक ने कहा, नियमित शारीरिक गतिविधियां कई तरीकों से हार्ट फेल होने के जोखिम कम करती हैं। मसलन, नियमित कसरत से वजन नहीं बढ़ता, जिसकी वजह से वजन संबंधी कार्डियोमेटाबोलिक स्थितियां, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डाइबिटीज को जोखिम कम होता है। इसके अलावा नियमित कसरत से दिल मजबूत होता है।
व्यापक अध्ययन की जरूरत
यह अध्ययन चूंकी पूरी तरह से श्वेत लोगों पर हुआ है, लिहाजा इसके व्यापक असर के लिए व्यापक अध्ययन की जरूरत है। इसके अलावा कितनी तीव्रता और कितनी मात्रा में शारीरिक गतिविधियों को दिल की सेहत पर कितना असर होता है, यह जानने के लिए भी अलग अध्ययन जरूरी है।
तेज चलना ज्यादा अच्छा
डॉ. को कहते हैं, 10 मिनट यूं ही पड़े रहने की तुलना में आराम से टहलना भी लाभदायक है। शोध के नतीजे बताते हैं कि शरीर के स्थिर पड़े रहने की तुलना में हर हलचल दिल की सेहत के लिए लाभदायी है। को ने बताया, अगर थोड़ा, तेजी से चलें, तो इसकी नतीजे और अच्छे हो सकते हैं।
मानक से ज्यादा वजनी लोगों को ज्यादा लाभ
बायो मास इंडेक्स (बीएमआई) मानकों के लिहाज मोटे लोगों के लिए नियमित कसरत ज्यादा लाभदायी साबित होती है। उनको इससे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल और बढ़े हुए ग्लूकोज जैसे समस्याओं से बचने या निपटने में मदद मिलती है।
इस तरह हुआ अध्ययन
डॉ. को ने बताया, अध्ययन में 96.6 फीसदी श्वेत लोग थे, जिनकी औसत उम्र 56 वर्ष थी। इनमें 57 फीसदी महिलाएं थीं। छह वर्ष तक लगातार इन लोगों की शरीरिक गतिविधियों और दिल के स्वास्थ्य का अध्ययन किया गया। इससे पता चला कि, जो लोग सप्ताह में 150-300 मिनट साधारण कसरत करते हैं उनमें कसरत नहीं करने वालों की तुलना में हार्ट फेल होने का खतरा 63 फीसदी कम था। इसी तरह सप्ताह में 75 से 150 मिनट भारी कसरत करने पर हार्ट फेल का खतरा 66 फीसदी कम मिला।