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रूस और यूक्रेन के बीच टकराव का कारण बना तोहफे में दिया गया द्वीप

Tue, 27 Nov 2018 07:55 PM IST
बीबीसी हिंदी
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Russia and Ukraine Dispute - फोटो : File Photo
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यूक्रेन के तीन नौसैनिक जहाजों पर हमले के बाद रूस और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ गया है। रूस ने क्रीमियाई प्रायद्वीप के पास यूक्रेन के तीन जहाजों पर हमला करके उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है।
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यूक्रेन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रूस के विशेष बलों ने बंदूकों से लैस दो नावों और नौकाओं को खींचने वाले एक जहाज का पीछा किया और फिर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया।

यूक्रेन ने कहा है कि इस घटना में क्रू के छह सदस्य जख्मी हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच क्रीमिया को लेकर तनाव चलता आ रहा है। 2003 की संधि के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच कर्च जलमार्ग और अजोव सागर के बीच जल सीमाएं बंटी हुई हैं।
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अजोव सागर जमीन से घिरा हुआ है और काला सागर से कर्च के तंग रास्ते से होकर ही इसमें प्रवेश किया जा सकता है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन के बंदरगाह से आ रहे जहाजों की निगरानी करना शुरू कर दिया था जिसका यूक्रेन ने विरोध किया था।

रूस ने ये निगरानी तब शुरू की थी जब मार्च में यूक्रेन ने क्रीमिया से एक मछली पकड़ने वाली नाव जब्त कर ली थी। रूस का कहना था कि जहाजों की जांच करना सुरक्षा कारणों से जरूरी है, क्योंकि यूक्रेन के कट्टरपंथियों से पुल को खतरा हो सकता है।

इसके बाद रूस ने जबरन यूक्रेनी जहाजों पर कब्जा कर लिया। इसने यूक्रेन और रूस के बीच टकराव को और गहरा कर दिया। हालांकि, रूस का कहना है कि उसने इस टकराव की शुरुआत नहीं की है। उसका आरोप है कि यूक्रेन के जहाज आजोव सागर में गैरकानूनी ढंग से उसकी जल सीमा में घुस आए थे।

इसके बाद रूस ने कर्च में तंग जलमार्ग पर एक पुल के नीचे टैंकर तैनात करके आजोव सागर की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया।
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रूस और यूक्रेन के बीच टकराव का कारण

अजोव सागर क्रीमिया के पूर्व में और यूक्रेन के दक्षिण में स्थित है। इसके उत्तरी किनारों पर यूक्रेन के दो बंदरगाह हैं, बर्डयांस्क और मेरीपोल। इनका इस्तेमाल अनाज और इस्पात जैसे उत्पाद का निर्यात करने में उपयोग किया जाता है। यहां से कोयले का आयात भी होता है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको का कहना है कि ये बंदरगाह यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पोरोशेंको ने सितंबर में वॉशिंगटन पोस्ट से कहा था, ''अगर रूस मेरीपोल से लोहे और स्टील के जहाज रोक लेता है तो इससे उसे हजारों डॉलर का नुकसान होगा।''

इस महीने की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने रूस को यूक्रेन के जहाजों की निगरानी के ख़िलाफ कदम उठाने की चेतावनी दी थी। यूरोपीय संघ कहना था कि आवाजाही की स्वतंत्रता को लेकर संधि के बावजूद भी जांच करना गलत है।

यूक्रेन और रूस के बीच ताजा विवाद ने दोनों देशों के बीच पिछले करीब पांच सालों से चल रहे टकराव को और बढ़ा दिया है। 2014 में रूस ने क्रीमिया प्रायद्वीप का पुन:विलय कर लिया था। इससे पहले तक क्रीमिया यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था।

यूक्रेन में साल 2014 में हुई क्रांति के बाद देश के रूस समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को पद छोड़ना पड़ा था। तब रूस ने यूक्रेन में हस्तक्षेप करके क्रीमिया में रूसी सेना भेजी और उसे अपने कब्जे में ले लिया।

इसके पीछे तर्क दिया गया कि वहां रूसी मूल के लोग बहुतायत में हैं और विरोध प्रदर्शन के बीच उनके हितों की रक्षा करना रूस की जिम्मेदारी है।

क्रीमिया में सबसे ज्यादा जनसंख्या रूसियों की है। इसके अलावा वहां यूक्रेनी, तातार, आर्मेनियाई, पॉलिश और मोल्दावियाई हैं। क्रीमिया पर कभी क्रीमियाई तातार बहुसंख्या में थे लेकिन उन्हें जोसेफ स्टालिन के दौरान मध्य एशिया भेज दिया गया था।
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रूस का यूक्रेन को तोहफा

1954 में सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता निकिता ख्रुश्चेव ने क्रीमिया को यूक्रेनी-रूसी मैत्री और सहयोग के एक तोहफे के तौर पर इसे यूक्रेन को सौंप दिया था। उस वक्त यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन, यूक्रेन के सोवियत संघ से अलग होने के बाद क्रीमिया रूस और यूक्रेन के बीच झगड़े की वजह बन गया।

अब, यूक्रेन और पश्चिमी देश रूस पर यूक्रेन में अलगाववादियों को हथियारों की मदद करने का आरोप लगाते हैं। हालांकि, रूस इससे इनकार करता है लेकिन यह मानता है कि रूसी स्वयंसेवक विद्रोहियों की मदद कर रहे हैं।

ताजा टकराव के बाद यूक्रेन में रूसी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दूतावास के बाद करीब 150 प्रदर्शकारी इकट्ठा हुए और कुछ ने दूतावास की एक कार को आग लगा दी। यूक्रेन के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि इस संबंध में 'वॉर कैबिनेट' की जरूरी बैठक बुलाई गई है।

अब यूक्रेन की संसद मार्शल लॉ लगाने को लेकर फैसला ले सकती है। यूक्रेन के सांसद सोमवार को ही मार्शल लॉ लगाने के एलान पर पर वोटिंग करेंगे। मार्शल लॉ में वर्तमान कानूनों की जगह सैन्य कानून ले लेते हैं। इस बीच यूरोपीय संघ और नाटो देश यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं।
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