रूसी हाउस के निदेशक ओलेग ओसिपोव
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यूक्रेन से युद्ध के बाद भी रूस में 30 हजार से अधिक भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। दरअसल 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से रूसी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर सभी चिंतित थे। इस बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि पिछले दो वर्षों में रूस में भारतीय छात्रों की संख्या में कमी नहीं आई है। नई दिल्ली में रूसी हाउस के निदेशक ओलेग ओसिपोव ने इस बात पर प्रकाश डाला।
संघर्ष वाले क्षेत्रों से दूर हैं भारतीय छात्र
ओलेग ओसिपोव ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय छात्रों को संघर्ष वाले इलाकों से दूर रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्रों की संख्या में कोई कमी नहीं देखने को मिली। जहां तक रूसी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की स्थिति का सवाल है, इस बारे में ओसिपोव का कहना है कि कुछ छात्र क्रीमिया में पढ़ रहे हैं तो कुछ सेवस्तोपोल के शहरों और रूस के पश्चिमी हिस्सों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।
रूस में भारतीय छात्रों की संख्या पर बोले ओसिपोव
रूसी हाउस के निदेशक ओलेग ओसिपोव ने आश्वासन दिया कि रूसी विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता एक समान बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय छात्रों के लिए कोई विशेष सुरक्षा उपाय नहीं हैं, क्योंकि रूस में सभी निवासियों और विदेशियों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल एक जैसे हैं। रूस में भारतीय छात्रों की संख्या के संबंध में ओसिपोव ने अलग-अलग आंकड़ों का जिक्र किया है, जो लगभग 25 से 30 हजार के बीच है।
पूर्व भारतीय छात्रों की तारीफ
साल 2022 में रूस के आक्रमण के मद्देनजर लगभग 18,000 छात्रों को यूक्रेन से निकाला गया था। ओसिपोव ने कहा कि इस काम में पूर्व भारतीय छात्रों द्वारा भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया था। उनके अनुसार भारतीय छात्रों ने अर्थव्यवस्था, चिकित्सा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी जगह बनाई है। खास बात यह है कि रूसी अधिकारी की यह टिप्पणी 11 से 13 अप्रैल तक दिल्ली में होने वाले भारत-रूस शिक्षा शिखर सम्मेलन से पहले आई है।