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कोरोना के जाने के बाद भी अरसे तक लोगों में बना रह सकता है अवसाद या खौफ

Fri, 22 May 2020 07:15 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
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कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया में भले ही एक समय बाद यह वायरस चला जाए, मगर इसका असर अरसे तक बना रहने वाला है। लोगों की लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक सेहत खराब रह सकती है। कोरोना के जाने के बाद भी लोग अरसे तक चिड़चिडे़पन, डर या अवसाद से जूझ सकते हैं। खासकर यह उन इलाकों के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकता है, जहां की आबादी कोरोना से ज्यादा संक्रमित रही है। अमेरिका के एक अध्ययन में यह दावा किया गया है।

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येल स्कूल के सार्वजनिक स्वास्थ्य के शोधकर्ताओं ने न्यू ऑर्लियंस में कम आय वाली महिलाओं पर अध्ययन किया। 2005 में आए चक्रवाती तूफान कैट्रीना और उसके बाद के हालातों का सामना करने वाली इन महिलाओं पर अध्ययन किया गया। महिलाओं ने इस भीषण तबाही के अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए और वे आज भी तबाही से पैदा हुए हालातों से उबर नहीं पाई हैं।

इनके अनुभव का आकलन करने पर पाया गया कि जिस तरह से इस वक्त कोरोना के चलते लोग अपनों को खो रहे हैं और उनके जाने के गम, इलाज और दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं, वैसे ही 2005 के कैट्रीना के बाद में भी ऐसे ही हालातों का सामना कर रहे थे। येल स्कूल की असिस्टेंट प्रोफेसर सारा लोवे ने कहा, कोरोना के चलते लोगों को अरसे तक शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

  • वित्तीय नुकसान और बेरोजगारी को अध्ययन में नहीं किया शामिल

हालांकि, इस अध्ययन में महामारी के चलते होने वाले वित्तीय नुकसानों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है, जिसका सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अहम प्रभाव पड़ता है। ये कारक भी अरसे तक लोगों को दिमागी तौर पर बीमार बनाते हैं।

  • लोगों के मन से दूर करनी होगी चिंता और खौफ

शोधकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण के प्रति लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के प्रयासों को बढ़ावा देने के अलावा लोगों के दिलोदिमाग से चिंता और खौफ से निजात दिलाने की कोशिशें होनी चाहिए। साथ ही पूरक स्वास्थ्य सेवाओं को उन लोगों को प्रदान किया जाना चाहिए जो दुख में डूबे हुए हैं या महामारी से काफी डरे हुए हैं।

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