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अमेरिका में भी गूंजा दिल्ली हिंसा का मामला, सांसदों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया, जताई चिंता

Thu, 27 Feb 2020 03:02 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की दावेदार एलिजाबेथ वारेन ने कहा, भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना अहम है, लेकिन हमें सच्चाई की बात करनी चाहिए, जिनमें धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी शामिल है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं है। 
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दिल्ली हिंसा के दौरान हालात - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर दिल्ली में हुई हिंसा पर अमेरिकी सांसदों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा, भारत में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ना भयावह है। लोकतांत्रिक देशों को विभाजन व भेदभाव बर्दाश्त नहीं करना चाहिए या ऐसे कानूनों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, जो धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करते हों। सांसद एलन लोवेंथाल ने इसे नैतिक नेतृत्व की विफलता बताते हुए कहा, हमें भारत में मानवाधिकार पर खतरे के बारे में बोलना चाहिए। 

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वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की दावेदार एलिजाबेथ वारेन ने कहा, भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना अहम है, लेकिन हमें सच्चाई की बात करनी चाहिए, जिनमें धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी शामिल है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ हिंसा स्वीकार्य नहीं है। सांसद रशीदा तालिब ने कहा, इस सप्ताह ट्रंप भारत में थे लेकिन दिल्ली में असली खबर सांप्रदायिक हिंसा होनी चाहिए। इस पर हम चुप नहीं रह सकते।

अमेरिकी मीडिया ने भी दी तवज्जो  

वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ये दंगे विवादित नागरिकता कानून पर महीनों तक चले प्रदर्शनों के बाद चरम पर पहुंचे तनाव को दिखाते हैं। साथ ही मोदी सरकार के समर्थकों और आलोचकों के बीच बढ़ रहे मतभेद को भी दिखाते हैं। वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप जब भारत यात्रा पर थे, उसी दौरान वहां हुए दंगों में कई लोग मारे गए।

यूएन प्रमुख भी रख रहे स्थिति पर नजर

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रमुख एंटोनियो गुटेरस दिल्ली की स्थिति पर करीबी से नजर बनाए हुए हैं। गुटेरस के प्रवक्ता स्टीफन दुजेरिक ने कहा, यूएन प्रमुख का मानना है कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने की अनुमति देना बेहद जरूरी है। वहीं, सुरक्षा बलों को संयम बरतना चाहिए।

केंद्र और दिल्ली सरकार उठाए उपयुक्त कदम

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इस बीच, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशियेटिव (सीएचआरआई) ने केंद्र व दिल्ली सरकार से हिंसा रोकने को लेकर उपयुक्त कदम उठाने की मांग की है। साथ ही सरकार से पुलिस की निष्क्रियता व राजनीतिक और नागरिक प्रशासन के नाकाम रहने पर जिम्मेदारी तय करने को भी कहा गया है।
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