ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह समुद्री लुटेरों (पायरेट्स) जैसे हैं। उन्होंने वाशिंगटन पर ईरानी जहाजों को जब्त करके समुद्री डकैती को सामान्य बनाने का आरोप लगाया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
प्रवक्ता बघाई ने एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी जहाजों पर गैरकानूनी कब्जे को खुलेतौर पर 'समुद्री डकैती' बताया है और बेशर्मी से यह शेखी बघारी है कि हम समुद्री डाकुओं की तरह काम करते हैं। उन्होंने आगे कहा, यह कोई जुबान फिसलने का मामला नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही के खिलाफ उनके आपराधिक कृत्यों की एक सीधी और गंभीर स्वीकारोक्ति थी।
उन्होंने आगे अतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के सदस्य देशों और यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से आह्वान किया कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के ऐसे घोर उल्लंघन को सामान्य बनाने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज करें।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या बयान दिया था?
ईरान की ओर से यह टिप्पणी ट्रंप के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था- हम समुद्री लुटेरों जैसे हैं। फ्लोरिडा में पाम बीच के फोरम क्लब में रात्रिभोज में ट्रंप ने समुद्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक विस्तृत ब्योरा पेश किया। उन्होंने सीधी-सपाट भाषा और दृश्य चित्रण का इस्तेमाल करते हुए जहाजों और तेल के टैकरों को जब्त करने की प्रक्रिया को बताया।
ट्रंप ने कहा कि समुद्र में एक सैन्य कार्रवाई के दौरान उनके कर्मचारी ने एक जहाज को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया और फिर उसे निष्क्रिय कर दिया। उन्होंने कहा, अपना जहाज घुमा दो! तुरंत इंजन कक्ष खाली करो। आप देख सकते हैं कि सभी लोग वहां से भाग रहे हैं। ट्रंप ने आगे कहा, किसने सोचा होगा कि हम ऐसा करेंगे? हम समुद्री लुटेरों जैसे हैं। हम कुछ हद तक समुद्री लुटेरों जैसे हैं।
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ट्रंप ने ईरान को बताया था दादागिरी करने वाला
ट्रंप ने इस कार्रवाई को ईरान के साथ जारी टकराव का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, लेकिन हम खेल नहीं खेल रहे हैं, क्योंकि आप जानते हैं, पिछले 47 वर्षों से ईरान हर किसी को अपनी धौंस दिखाता आ रहा है। वे ही असली दादागिरी करने वाले हैं।
ट्रंप ने ईरान के अंदरूनी ढांचे और नेतृत्व पर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को यह नहीं पता कि तेहरान में वे किससे निपट रहे हैं। उन्होंने कहा, उनके पास न कोई रडार हैं, न कोई नेता। असल में उनके सभी नेता जा चुके हैं। यह हमारी समस्या का ही एक हिस्सा है। वे फोन करके कहते हैं- मैं मोहम्मद हूं..। मैं पूछता हूं- क्या आप नेता हैं? हम तो एक नेता ढूंढ रहे हैं। यह दुनिया का एकमात्र देश है, जहां कोई नेता बनने को तैयार नहीं है।