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यूएसएस कनेक्टिकट दुर्घटना: अभी भी परदे में है अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी के हादसे का रहस्य

Fri, 05 Nov 2021 07:36 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग

सार

अमेरिकी नौसेना का कहना है कि पनडुब्बी उस समय दक्षिण चीन सागर से 2,900 किलोमीटर की दूरी पर प्रशांत महासागर में थी। वह बिजली बनाने के अपने संयंत्र से संचालित थी। लेकिन उस पर लगा परमाणु रिएक्टर इस हादसे में क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। लेकिन अमेरिकी नौसेना ने माना है कि पनडुब्बी पर जो लोग मौजूद थे, उनमें 11 को इस हादसे में चोट लगी...
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यूएसएस कनेक्टिकट - फोटो : Agency (File Photo)
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अमेरिका की परमाणु पनडुब्बी यूएसएस कनेक्टिकट की पिछले महीने महीने प्रशांत महासागर में हुई दुर्घटना को रहस्य अभी भी बना हुआ है। चीन इस हादसे को लेकर पहले से गंभीर सवाल उठा रहा था। अब अमेरिका में भी इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने उन सैन्य अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है, जो इस पनडुब्बी का संचालन कर रहे थे।

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अमेरिकी मीडिया छपी खबरों में इस बात का जिक्र किया गया है कि यूएसएस कनेक्टिकट को वहां पनडुब्बियों के बीच ‘लग्जरी स्पोर्ट्स कार’ कहा जाता रहा है। इसके निर्माण पर तीन अरब डॉलर का खर्च आया था। इसमें अति आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हुए हैं। लेकिन इतनी महंगी और आधुनिक तकनीक से लैस पनडुब्बी होने के बावजूद यह कैसे दुर्घटनाग्रस्त हो गई, इसको लेकर अमेरिकी रक्षा हलकों में अब सवाल पूछे जा रहे हैं।

दो अक्तूबर को पनडुब्बी समुद्र के अंदर एक चट्टान से टकरा गई। अमेरिकी नौसेना का कहना है कि पनडुब्बी उस समय दक्षिण चीन सागर से 2,900 किलोमीटर की दूरी पर प्रशांत महासागर में थी। वह बिजली बनाने के अपने संयंत्र से संचालित थी। लेकिन उस पर लगा परमाणु रिएक्टर इस हादसे में क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। लेकिन अमेरिकी नौसेना ने माना है कि पनडुब्बी पर जो लोग मौजूद थे, उनमें 11 को इस हादसे में चोट लगी।
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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस बारे में और कोई विवरण अब तक जारी नही किया है। लेकिन गुरुवार को अमेरिकी नौसेना ने पनडुब्बी संचालन टीम का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों को उनकी ड्यूटी से हटा दिया। इस बीच अमेरिका के सातवें बेड़े के कमांडर वाइस एडमिरल कार्ल थॉमस ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘अगर नौवहन नियोजन, पनडुब्बी संचालन, और जोखिम प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने विवेक का इस्तेमाल किया होता, तो हादसे को टाला जा सकता था। समुद्र के भीतर का माहौल बहुत कठिन होता है, जिसमें छोटी-सी गलती का गंभीर नतीजा हो सकता है।’

कैलिफॉर्निया स्थित स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओसियनोग्राफी में भू-भौतिकी के प्रोफेसर डेविड सैंडवेल ने इसी चैनल से कहा कि दक्षिण चीन सागर के पास समुद्री तल में 50 फीसदी से भी ज्यादा हिस्से की अभी माप नहीं हुई है। उन्होंने कहा- ‘इसलिए इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि आप किसी चीज से वहां टकरा जाएं।’ दक्षिण चीन सागर दुनिया का तीसरा सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है।

अमेरिकी नौसेना ने यह भी नहीं बताया है कि ठीक-ठीक किस जगह पर यूएसएस कनेक्टिकट की चट्टान से टक्कर हुई। सैंडवेल ने कहा कि वर्टिकल ग्रैविटी ग्रेडिंग विधि का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने 27 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां ये टक्कर हुई हो सकती है। उन्होंने कहा- ‘ये वे स्थान हैं, जिनके बारे में ग्रैविटी यह बताती है कि वहां 400 मीटर से भी कम सतही गहराई है। यानी वहां इतनी गहराई पर जाने पर भी पनडुब्बी किसी चीज से टकरा सकती है।’

इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर इस बारे में अमेरिका से सवाल पूछे हैं। उसने अमेरिका सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि परमाणु पनडुब्बी उस क्षेत्र में किस मकसद से गई थी। साथ ही उसने यह बताने को कहा है कि हादसा ठीक-ठीक किस जगह पर हुआ और क्या हादसे की वजह से वहां परमाणु लीक हुआ। सीएनएन की एक टिप्पणी में बताया गया है कि अमेरिका ने ये जानकारियां नहीं दी हैं। लेकिन जहां तक दक्षिण चीन सागर का सवाल है, गोपनीयता बरतना उसकी हमेशा ही नीति रही है।

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