ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 (कोरोना वायरस) के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 अब तक करीब 200 बार जेनेटिक बदलाव कर चुका है और यह लगातार मानव शरीर के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए तेजी से अपने जींस में बदलाव कर रहा है। यह दावा वैश्विक स्तर पर 7500 से ज्यादा संक्रमित मरीजों के सैंपलों में मिले वायरस के जींस का विश्लेषण करने के बाद किया गया है।
माना जा रहा है कि यह खोज इस जानलेवा महामारी की दवा और वैक्सीन बनाने में अहम मदद दे सकती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन का यह अध्ययन साइंस जर्नल ‘इंफेक्शन, जेनेटिक्स एंड इवोल्यूशन’ में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में वायरस के जीनोम की विविधता के पैटर्न की विशेषता को चिह्नित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि सार्स-कोव-2 की वैश्विक जेनेटिक विविधता का बड़ा हिस्सा कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देशों में मौजूद था। यह फैलाव इन देशों में एक भी ‘पेशेंट-0 (वह मरीज, जिससे महामारी की शुरुआत हुई)’ की अनुपस्थिति के बावजूद हो रहा था।
कम म्यूटेशन वाले जीनोम से बन सकती है वैक्सीन
वैज्ञानिकों ने 198 म्यूटेशन की पहचान की है, जो स्वतंत्र रूप से एक से अधिक बार दिखाई दिए हैं। इनसे यह पता लग सकता है कि वायरस कैसे फैल रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिन जीनोम के कुछ हिस्सों में बहुत कम म्यूटेशन हुआ है, उन्हें वैक्सीन बनाने के काम में लिया जा सकता है। बालोक्स ने कहा कि चुनौती यह है कि उसे रोकने वाला टीका या दवा क्या लंबे समय तक प्रभावी हो सकते हैं?