वुहान में उपजा कोविड-19 वायरस अमेरिका में सबसे पहले वाशिंगटन के प्रमुख शहर सिएटल पहुंचा। यहां वह कुछ हफ्ते बिना पकड़ में आए लोगों में रहा और संक्रमण बढ़ाता रहा। यहां सामुदायिक संक्रमण के बाद यह अमेरिका के 14 अन्य राज्यों से होता हुआ छह अन्य देशों में पहुंच गया। वैज्ञानिकों ने जेनेटिक फिंगरप्रिंट्स से वायरस का ‘संक्रमण-पथ’ या ‘पदचिह्नों’ का पता लगाकर इसके दुनियाभर में पहुंचने का मार्ग बनाया है।
जीनोम सीक्वेंसिंग तकनीक से किए गए शोध में यह खुलासा हुआ कि वायरस जितनी तेजी से फैल रहा है उतनी ही तेजी से म्यूटेट कर रहा है या अपना रूप भी बदल रहा है। चिंता की बात है कि सिएटल में अपना नया अनुवांशिक संस्करण बनाकर वायरस सामने आए बगैर ज्यादा मजबूत होकर उभरा।
जीनोम सीक्वेंसिंग में पता लगा कि समुदाय से गुजरने के दौरान कोविड-19 करीब दो बार म्यूटेट कर चुका था। हर बार 29,903 न्यूक्लियोटाइड्स के आरएनए स्ट्रैंड का एक अक्षर बदला। न्यूक्लियोटाइड्स डीएनए और आरएनए के बुनियादी निर्माण खंड हैं। इस तब्दीली से वायरस का हर नया रूप उसके पूर्ववर्ती से थोड़ा-सा अलग होता गया।
वुहान में जिस पैटर्न में कोरोना उपजा, जर्मनी पहुंचते-पहुंचते उसके आरएनए स्ट्रैंड में तीन बदलाव तो इटली में दो बदलाव दिखे। अमेरिका के पहले मरीज में स्ट्रेन यूरोप और अन्य जगहों पर फैले स्वरूप से काफी अलग था। वॉशिंगटन में मिला वायरस सबसे ज्यादा ताकतवर बना हुआ है।
नए मामलों की सीक्वेंसिग ने नई संभावना उजागर की हैं। वाशिंगटन की सीमा से सटे कनाडाई प्रांत ब्रिटिश कोलंबिया में कई मामलों में कोरोना का आनुवांशिक पदचिह्न (जेनेटिक फिंगरप्रिंट ) वुहान से लौटे यात्री के काफी समान मिला है। संभावना बनती है कि उसी दौरान कोई व्यक्ति वुहान से ब्रिटिश कोलंबिया या आसपास के इलाके में समान आनुवांशिक छाप वाला वायरस लेकर आया होगा। शायद उस व्यक्ति के बीमार होने पर वहां प्रकोप फैला। लेकिन वह कौन था, उसने कैसे फैलाया, इसका शायद ही कभी जवाब मिल पाएगा।