अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी मॉडर्ना के बाद अब जर्मनी की दवा कंपनी बायोएनटेक और उसकी साझेदार अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर ने कोरोना के टीके के इस्तेमाल की लिए मंजूरी मांगी है।
बायोएनटेक और उसकी साझेदार अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर ने मंगलवार को कहा है कि उन्होंने ‘यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी’ के समक्ष कोरोना वायरस के उनके टीके को मंजूरी के लिए एक आवेदन सौंपा है। दोनों कंपनियों ने कहा कि सोमवार को सौंपे गए आवेदन की समीक्षा प्रक्रिया को पूरा किया गया। उन्होंने इसे एजेंसी के समक्ष 6 अक्तूबर को शुरू किया था।
अमेरिका की दवा कंपनी मॉडर्ना ने अमेरिकी और यूरोपीय नियामकों से कोविड-19 के अपने टीके का आपातकालीन उपयोग करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। कोरोना वैक्सीन विकसित करने में की दौड़ में आगे चल रही मॉडर्ना ने दावा किया कि उसकी वैक्सीन सभी तरह के वर्गों और समूहों के लोगों में प्रभावी रही है। कंपनी ने कहा कि तीसरे चरण के ट्रायल के बाद वैक्सीन 94.1 फीसदी प्रभावी रही है। मॉडर्ना की वैक्सीन के परीक्षण में 30 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया है। कंपनी ने दावा किया कि उसकी वैक्सीन मरीजों को गंभीर स्थिति में पहुंचने से रोकने में 100 फीसदी प्रभावी है।
प्रतिद्वद्वी कंपनी मॉडर्ना के इस अनुरोध के एक दिन बाद इन कंपनियों ने यह कदम उठाया है। बायोएनटेक ने कहा है कि टीके को वर्तमान में 'बीएनटी162बी2' नाम दिया गया है और यदि यह मंजूर हो जाता है, तो यूरोप में इसका इस्तेमाल 2020 के अंत से पहले शुरू हो सकता है।
दो संभावित टीकों की सुरक्षा और प्रभाव पर यूरोपीय दवा नियामक की नजर
यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी ने कहा कि वह 29 दिसंबर के यह तय करने के लिए बैठक बुलाएगी कि क्या फाइजर और बायोनटेक द्वारा विकसित कोविड-19 का संभावित टीका मंजूरी देने के लिए सुरक्षित और प्रभावी है अथवा नहीं। एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि वह 12 जनवरी तक फैसला करेगी कि मॉडर्ना इंक द्वारा विकसित प्रायोगिक कोविड-19 टीके को मंजूरी दे या नहीं।
यूरोपीय संघ के दवा नियामक ने एक बयान में कहा कि मॉडर्ना इंक द्वारा मुहैया कराए गए प्रयोगशाला आंकड़ों के आधार पर पहले ही टीके की समीक्षा शुरू हो चुकी है और अब उस आंकड़े का आकलन कर रही है कि टीका कितने प्रभावी तरीके से रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करता है और यह यूरोप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए पर्याप्त सुरक्षित है या नहीं।
मैक्सिको में वायरस के कारण हालात बहुत खराब : डब्ल्यूएचो
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण मैक्सिको बुरी हालत में है। इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने मैक्सिको के नेताओं से आग्रह किया कि वे संक्रमण को लेकर गंभीर रवैया अपनाएं और अपने नागरिकों के सामने उदाहरण पेश करें। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टी ए गेब्रेसस का बयान सोमवार को आया, जब मैक्सिको में महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,05,940 हो गई। देश में अब तक संक्रमण के 1,113,543 मामले सामने आ चुके हैं। जांच की संख्या में कमी के चलते मैक्सिको में संक्रमितों की वास्तविक संख्या कहीं अधिक होने का अनुमान है।
गेब्रेसस ने कहा कि मैक्सिको में संक्रमण के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं।मास्क न लगाने को लेकर राष्ट्रपति लोपेज ओबराडोर की कई बार आलोचना की जा चुकी है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने देश के नेताओं से महामारी के प्रति गंभीर रवैया अपनाने का आग्रह किया।