लंबे समय तक काम करने को लेकर डब्ल्यूएचओ के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य विभाग की निदेशक मारिया नीरा ने कहा, हफ्ते में 55 घंटे या उससे अधिक घंटे काम करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इस जानकारी से हम उन श्रमिकों की जान बचाना चाहते हैं, जो लंबे समय तक काम में जुट रहते हैं।
चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया के हालात बेहद खराब
डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का यह संयुक्त अध्ययन कुल 194 देशों के आंकड़ों पर आधारित है।अध्ययन में 2000 से लेकर 2016 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। इसमें कहा गया है कि हर हफ्ते 35-40 घंटे काम करने वालों की तुलना में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने वालों में 35 फीसदी स्ट्रोक और 17 फीसदी तक जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। लंबे समय तक काम करने के दुष्प्रभाव से चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सबसे अधिक प्रभावित देश हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख समेत कई अन्य अधिकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी में लंबे समय तक काम करने की प्रवृत्ति 9 फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति में सुधार करना बेहद जरूरी है।