फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोविड-19: डोनाल्ड ट्रंप ने रोकी डब्ल्यूएचओ की फंडिंग, चीन ने बताया अनैतिक कदम

Wed, 15 Apr 2020 08:08 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन, बीजिंग

सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का फंड रोकना अनैतिक- चीन
  • अपनी नाकामी छुपाने के लिए अमेरिका डब्लूएचओ पर लगा रहा है आरोप
  • फंड रोकने को लेकर ट्रंप की चौतरफा आलोचना
  • डब्लूएचओ के फंड में अमेरिका की 22 फीसदी की हिस्सेदारी
विज्ञापन
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की फंडिंग को रोक रहा है। ट्रंप ने संगठन पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस के प्रसार का कुप्रबंधन करने और उसकी जानकारी छिपाने में संगठन की भूमिका का आकलन किया जाएगा। वहीं चीन ने इसे अमेरिका की नाकामी छुपाने की कोशिश करार देते हुए इस कदम को अनैतिक करार दिया है।

विज्ञापन


कोरोना वायरस का पहला मामला पिछले साल नवंबर में चीन के वुहान शहर में सामने आया था। अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार अब तक यह वायरस विश्व में एक लाख 19 हजार लोगों की जान ले चुका है। जिसमें से अमेरिका में 25,000 लोगों की मौत हुई है। 

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ वार्ता करते हुए कहा, 'आज मैं अपने प्रशासन को डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने का आदेश दे रहा हूं। इसके साथ ही कोरोना वायरस के प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। हर कोई जानता है कि वहां क्या हुआ है।'
विज्ञापन




ट्रंप प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया है। जिसकी वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था में ठहराव आ गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका के करदाता सालाना डब्ल्यूएचओ को यूएस डॉलर 400 (लगभग 30 अरब) से 500 मिलियन (लगभग 38 अरब) की राशि देते हैं। जबकि चीन मोटे तौर पर सालाना यूएस डॉलर 40 मिलियन (लगभग तीन अरब) या उससे भी कम राशि देता है।

ट्रंप के अनुसार डब्ल्यूएचओ ने कोरोना महामारी को लेकर पारदर्शिता नहीं रखी और संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को सबसे ज्यादा फंड देने वाला अमेरिका अब इसपर विचार करेगा कि संगठन को दिए जाने वाले पैसे का क्या किया जाए। हाल ही में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने कहा था कि कोविड-19 के मामले को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।

अपना कर्तव्य निभाने से चूका डब्ल्यूएचओ

ट्रंप का कहना है कि कोरोना के प्रकोप में अपना कर्तव्य निभाने से डब्ल्यूएचओ पूरी तरह नाकाम हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन में जब यह वायरस फैला तो संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने उसे छुपाने की कोशिश की और इसके लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 

चीन ने किया विरोध

चीन ने इसे अमेरिका की नाकामी छुपाने की कोशिश करार दिया है और अनैतिक करार दिया है। चीन का आरोप है कि अमेरिका कोरोना को गंभीरता से न लेने और अपने देश में घरेलू हालात न संभाल पाने की अपनी नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन पर आरोप मढ़ रहा है और उसकी फंडिंग रोक रहा है।

चाइनीज सेंटर फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के प्रमुख अधिकारी जेंग जुआंग ने कहा है कि क्या डब्लूएचओ की फंडिंग रोककर अमेरिका अपने देश में इस वायरस से जीत पाएगा। इसे एक खराब संकेत बताते हुए जेंग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि इस समय जब दुनिया कोविड-19 से लड़ रही है और इससे बचने की हर संभव कोशिश कर रही है, ऐसे में डब्लूएचओ की भूमिका सबसे ज्यादा अहम हो जाती है।

ऐसे समय में उसका फंड रोकना अनैतिक है और इससे अमेरिका खुद को दुनिया से अलग थलग कर लेगा। 2020-21 में अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे ज्यादा फंड देने वाला देश है और कुल फंड का करीब 22 फीसदी हिस्सा अमेरिका का ही है, लेकिन ऐसे कठिन वक्त में फंड रोककर अमेरिका ने दुनिया के सामने खुद को काफी छोटा साबित कर दिया है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें