कोरोना वायरस की मार से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका असर चीन पर भी देखा जा सकता है, जिसने इस वर्ष के लिए अपने रक्षा व्यय में वृद्धि का अनुमान घटा दिया है। चीन ने इस वर्ष के लिए 6.6 फीसदी की रक्षा खर्च वृद्धि का अनुमान लगाया। यह साल 1991 के बाद से सबसे धीमी वृद्धि है। चीन के नेता दुनियाभर से व्यापार प्रभावित होने और कोरोना वायरस के मद्देनजर अभूतपूर्व आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं।
चीन के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि आने वाले वर्ष में रक्षा खर्च बढ़कर 1.268 ट्रिलियन युआन (178 बिलियन डॉलर) हो जाएगा। इस आंकड़े को बीजिंग में वार्षिक नेशनल पीपुल्स कांग्रेस सत्र की शुरुआत में जारी किया गया था, इसकी तुलना पिछले साल 7.5 फीसदी की वृद्धि के साथ की गई थी।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) में सैन्य व्यय कार्यक्रम में एक शोधकर्ता नेन तियान ने कहा कि ऐसा लगता है कि चीन कोरोना वायरस महामारी से दूसरों की तुलना में जल्दी और बहुत छोटे परिणामों के साथ उबर गया, लेकिन इसकी अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के घटने का कुछ रूप अपरिहार्य है।
एसआईपीआरआई के अनुसार, चीन के सैन्य खर्च का आंकड़ा अमेरिका और क्षेत्रीय नीति निर्माताओं द्वारा बारीकी से देखा जाता है क्योंकि इससे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के विकास का अनुमान लगाने के लिए उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के कुछ टुकड़ों का पता चलता है। चीन 2019 में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश था, इसकी वैश्विक सैन्य खर्च में हिस्सेदारी 14 फीसदी थी, वहीं अमेरिका की हिस्सेदारी 38 फीसदी रही।