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दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में मास्क पहनना जरूरी, वरना काटनी पड़ेगी तीन माह की जेल

Mon, 04 May 2020 10:42 PM IST
अंशुल तलमले वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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बाजार में उपलब्ध डिजाइनर मास्क - फोटो : ट्विटर
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दुनिया भर में कोरोना वायरस से अब तक दो लाख, 50 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही संक्रमण के मामले भी बढ़कर 36 लाख के आसपास हो गए हैं। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत के कई शहरों में घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहनना जरूरी कर दिया गया है हालांकि कोरोना से बचाने में मास्क कितने उपयोगी हैं, इस पर लंबे समय से बहस भी जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी मानना है कि मास्क सिर्फ उन्हीं लोगों को लगाना चाहिए, जिन्हें खांसी, सर्दी जैसी बीमारी हो। पूर्णत: स्वस्थ्य व्यक्ति बिना मास्क के रह सकता है।

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इन देशों में मास्क न पहनने का निवेदन

महामारी के इस दौर में कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां जनता से मास्क न पहनने का निवेदन किया जा रहा है। यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर जैसे देश में सरकार ने जनता से स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पर्याप्त आपूर्ति और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) सुनिश्चित करने के लिए मास्क नहीं पहनने का आग्रह किया है। इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) भी सर्जिकल मास्क के उपयोग की वकालत नहीं करता है, लेकिन वायरस के प्रसार को धीमा करने के लिए आम घरेलू सामग्रियों से बने साधारण कपड़े से चेहरे को ढंकने की सलाह देता है।

कोविड-19 से पहले भी इन देशों में पहने जाते हैं मास्क

चीन, ताइवान या हांगकांग जैसे एशियाई देशों में, कोरोनवायरस वायरस महामारी से पहले भी लोगों के चेहरे पर मास्क दिखना आम बात थी। SARS और H1N1 जैसी बीमारियों के पिछले अनुभव के कारण बड़ी आबादी मास्क का इस्तेमाल करते आ रही थी। भारत में भी प्रदूषण की वजह से कई शहरों में चेहरा ढककर बाहर निकलने की परंपरा रही है।

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इन शहरों में मास्क पहनना जरूरी

  • सार्वजनिक जगह पर मास्क लगाकर घूमने की शुरुआत सबसे पहले वेनेजुएला में हुई। यहां की सरकार ने मार्च में नागरिकों के लिए बाहर निकलने से पहले मास्क का इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया।
     
  • वियतनाम ने 16 मार्च को लोगों के लिए फेस मास्क अनिवार्य किया।
     
  • 18 मार्च को, चेक गणराज्य सुपरमार्केट, फार्मेसियों और सार्वजनिक परिवहन में मास्क पहनने को अनिवार्य बनाने वाला पहला यूरोपीय देश बना।
     
  • स्लोवाकिया ने 25 मार्च को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान यह फैसला लिया। यहां तक कि राष्ट्रपति जुजाना कैपुटोवा ने जिस लाल मास्क का इस्तेमाल किया था वह उनके कपड़े से मेल खा रहा था।
     
  • 29 मार्च को, बोस्निया और हर्जगोविना ने अपने नागरिकों के लिए सड़कों पर या अपने घरों के बाहर चलने के दौरान मुंह और नाक को ढंकने वाले कपड़े पहनना अनिवार्य कर दिया।
     
  • 4 अप्रैल को कोलंबिया ने सार्वजनिक परिवहन साधनों, दुकानों, बैंक, बाजारों में निकलने से पहले मास्क पहनना जरूरी बनाया। इसी दिन यूएई ने भी यह नियम बनाया।
     
  • 6 अप्रैल को क्यूबा, ऑस्ट्रिया ने बिना चेहरा ढके बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाया। इसके ठीक अगले दिन यानी 7 अप्रैल को उत्तरी अमेरिका, मोरक्को ने नए नियम लगाए। इस बीच 1300 डरहम यानी 130 डॉलर और तीन माह तक की सजा का प्रावधान है।
     
  • तुर्की, ईरान ने अपने सभी नागरिकों को भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर खरीदारी करने या जाने पर मास्क पहनने का आदेश दिया।
     
  • 8 अप्रैल को चिली, 9 अप्रैल को कैमरून में लोगों के घरों से निकलने में पाबंदी लगा दी गई। अंगोला, बेनिन, बुर्किना, फासो, केन्या, लिब्रिया, रवांडा, सिसेरा लिनोन, इथोपिया, गैबन, जांबिया जैसे देशों में बेहद सख्ती ला दी गई।
     
  • 12 अप्रैल को इजराइल, 14 अप्रैल को अर्जेंटीना, 16 अप्रैल को पोलैंड, 20 अप्रैल को लक्जमबर्ग, 21 अप्रैल जमैका, 22 अप्रैल को जर्मनी ने अपने सभी 16 राज्यों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया। 26 अप्रैल को कतर ने बिना मास्क के बाहर जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया।
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