अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। सवाल यह कि कोरोना से निपटने को लेकर मिली चेतावनियां क्या वाकई नजरअंदाज की गईंं। कारण कि स्वास्थ्य से जुड़ी यूएस हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स उपसमिति समक्ष बायोमेडिकल एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के निदेशक डॉक्टर रिचर्ड ब्राइट (रिक ब्राइट) ने इस संबंध में खुलासा किया है।
स्वास्थ्य से जुड़ी यूएस हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स उपसमिति समक्ष ब्राइट ने गुरुवार को कहा कि उन्हें बायोमेडिकल एडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के निदेशक के पद से हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने साल के शुरू में ही कोरोना वायरस के खतरे को लेकर आगाह किया था।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा वह ट्रंप प्रशासन के समक्ष गैर अनुमति प्राप्त और पारदर्शी जानकारी के बिना अमेरिका के लोगों के उपचार के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन देने के संभावित जोखिमों के बारे में लगातार आगाह और विरोध कर रहे थे।
इस सवाल को छोड़ दें कि ब्राइट को उनके पद से क्यों हटाया गया, तो भी निश्चित रूप से कुछ हद तक इस दवा के संबंध कही गई उनकी बात सही साबित हुई है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे लगातार एक गेम चेंजर के रूप में प्रचारित किया था और जिसे फॉक्स न्यूज होस्ट और करीबी जैसे रुडी गिउलिआनी ने भी टाल दिया था।
बीते सोमवार को अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में न्यूयॉर्क में कोरोना के 1400 मरीजों पर किए गए एक अध्ययन की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इसमें कहा गया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से कोविड-19 के मरीजों को कोई लाभ नहीं हुआ, बल्कि उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ गया।
जेएएमए के अध्ययन में पिछले हफ्ते प्रकाशित एक न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन अध्ययन के नतीजों के आधार पर अध्ययन किया गया था, जिसके निष्कर्ष में कहा गया था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा ने कोरोना के 1376 मरीजों को ना तो रोग से लड़ने में कोई मदद की और ना ही कोई नुकसान पहुंचाया।
बता दें कि अध्ययन में शामिल यह मरीज 7 मार्च से 8 अप्रैल के बीच न्यूयॉर्क-प्रेस्बिटेरियन कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भर्ती कराए गए थे। संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विलियम शेफनर ने इन अध्ययनों के परिणामों ने वस्तुत: हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ताबूत में कील ठोक दी है।
गुरुवार को अपनी गवाही के दौरान ब्राइट ने यह भी बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में आने वाले समय में क्या हो सकता है। इस संबंध में उन्होंने कुछ गंभीर भविष्यवाणियां भी कीं। उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि अगर हम विज्ञान में आधारित एक राष्ट्रीय समन्वित प्रतिक्रिया विकसित करने में विफल रहते हैं, तो मुझे डर है कि यह महामारी और भी भयावह होगी।
बहुत बुरी और लंबे समय तक रहने वाली, अभूतपूर्व बीमारी और मृत्यु का कारण होगी। यह सब बिना स्पष्ट योजना और उन चरणों के कार्यान्वयन के बिना होगा जो मैंने और अन्य विशेषज्ञों ने उल्लिखित किए हैं। 2020 के आधुनिक इतिहास में इसका सबसे गहरा असर सर्दियों में होगा।
ब्राइट की चेतावनी हो सकता है सही हो। वहीं दूसरी ओर मिनेसोटा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ माइकल ओस्टरहोम ने कहा है कि कोरोना के कारण अमेरिका में अगले 18 महीनों में आठ लाख मौतें हो सकता हैं।