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न्यूयॉर्क में हालात बेहद खराब, सुरक्षा किट की कमी से इलाज करने से डर रहे डॉक्टर

Fri, 03 Apr 2020 05:42 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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coronavirus - फोटो : PTI
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कोरोना वायरस तेजी से दुनिया के लगभग हर देश में पहुंच चुका है। वायरस का केंद्र रहे चीन में जहां हालात धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे हैं, वही दुनिया के बाकी हिस्सों में इस जानलेवा वायरस ने तबाही मचा रखी है। आलम यह है कि अमेरिका, स्पेन, इटली और जर्मनी में चीन से ज्यादा मामले सामने आ चुके है। 

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जहां चीन में अब तक कोरोना वायरस से लगभग 81 हजार लोग संक्रमित है। वही अमेरिका में दो लाख 45 हजार, स्पेन में एक लाख 17 हजार, इटली में एक लाख 15 हजार और जर्मनी में 85 हजार  लोग इस वायरस से संक्रमित है। दुनिया में संक्रमितों की सबसे ज्यादा संख्या अमेरिका में है, जो इस महामारी का दंश झेल रहा है। 

अमेरिका में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर न्यूयॉर्क है। यहां हालात बद से बदतर हो चुके है। इस शहर के बारे में कहा जाता है कि यह कभी सोता नहीं है। वही अब इसकी सड़कों पर मातम पसरा हुआ है। न्यूयॉर्क में अब तक 51,809 लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके है और 1,562 लोगों की इस वायरस की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। 
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यहां कोरोना वायरस से लड़ने के लिए डॉक्टर और नर्सें मोर्चा संभाले हुए हैं। ये डॉक्टर और नर्सें यह जानते हुए भी मरीजों के इलाज में लगे हैं कि अगर जरा सी लापरवाही हुई तो वे भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ जाएंगे। 

गौरतलब हो कि चीन में 3,300, स्पेन में 12,000 और इटली में 5000 से ज्यादा मेडिकल स्टाफ इस बीमारी के चपेट में आ चुकी है। दुनियाभर में 300 से ज्यादा डॉक्टरों की मौत इस बीमारी से हो चुकी है। न्यूयॉर्क में अब तक दो नर्सों की इस वायरस से मौत हो चुकी है। 

न्यूयॉर्क के खराब हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां काम कर रहे चिकित्सा कर्मियों के पास अपनी सुरक्षा के लिए पहनने वाले पीपीई किट और मास्क तक की कमी है। ये सभी चिकित्सा कर्मी इतने खराब हालात में भी काम करने को मजबूर है। यहां के चिकित्सा कर्मचारियों से जानिए कि वे कोरोना से किस तरह लड़ रहे है...

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'अस्पतालों के गलियारे भी मरीजों से भरे, यह बेहद भयावह स्थिति'
न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में नर्स थोमस रिले जो इलाज के दौरान कोरोना की चपेट में आ गई थी, ने कहा कि मरीजों की भीड़ अस्पतालों में भरी हुई है, पूरे गलियारों में मरीजों की भीड़ मौजूद है, ऊपर से डॉक्टर्स और नर्स पीपीई जैसे सुरक्षा किट के कमी का सामना कर रहे है। ये बेहद ही भयावह स्थिति है।  

'मुझे यकीन नहीं हो रहा ये अमेरिका में हो रहा है'
कैली कैबरा नाम की एक नर्स ने बताया कि आपातकाल वार्डों में मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है। साथ ही सुरक्षा किट की कमी के चलते हम खतरे में काम कर रहे है, यह हमें और मरीजों दोनों को खतरे में डाल रहा है। मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि यह सब अमेरिका में हो रहा है। ये बहुत दुख की घड़ी है। 

'चारों ओर डर का माहौल, ऐसा लग रहा है कि मैं दूसरे देश में हूं'
नर्स क्रिश्चियन केल्डरन ने बताया कि जैसे ही शाम होती है हमें ड्यूटी के लिए निकलना पड़ता है। मैं जो मास्क का प्रयोग कर रही हूं उस पर मैंने वॉरियर्स (योद्धा) लिख लिया है, क्योंकि हम एक युद्ध लड़ रहे हैं। हमारा सामना एक अज्ञात, अदृश्य और अप्रत्याशित दुश्मन से हैं। मैं 15 साल से न्यूयॉर्क के प्रेस्बिटेरियन हॉस्पिटल के आईसीयू में काम कर रही हूं। लेकिन ऐसी भयावह स्थिति कभी नहीं देखी है, चारों ओर डर का माहौल है। मुझे लग रहा है कि मैं किसी दूसरे देश में हूं। इसने शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही तरीके से हमें तोड़ दिया है। 

'काम पर जाने डर लग रहा है'
न्यूयॉर्क में सर्जन डॉ कोर्नेलिया ग्रिग्स ने कहा कि मेरे पूरे जीवनकाल में यह पहला ऐसा मौका है, जब मुझे काम पर जाने से डर लग रहा है। लेकिन हमें जान बचाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है और हम इसमें जी-जान से लगे हुए है। पहले मैंने और मेरे पति ने कभी वसीयत लिखने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन यह अब जरूरी हो गया है। 

'मुझे पता है मैं अपने साथियों को खोने वाली हूं'
ऐसे ही एक और नर्स किम्बर्ली मार्श ने बताया कि हम सब जानते ही हमारे साथ क्या होने वाला है। मैं यह बात पूरी तरह जानती हूं कि कुछ दिनों में मैं अपने कुछ साथियों को खोने वाली हूं। इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है।
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