पिछले दो दशकों में सार्स, मर्स, इबोला, निपाह के बाद अब कोरोना वायरस ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है। एक के बाद एक सामने आ रहे खतरनाक वायरस को लेकर वैज्ञानिकों के हाथ भी बंधे दिखते हैं। दरअसल, धरती पर करीब 10 खरब ऐसे वायरस हैं, जिनके नाम तक हमें मालूम नहीं।
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल इस विविध विषाणु मंडल (वायरोस्फीयर) के करीब सात हजार प्रजातियों के ही नमूने जुटाए जा सके हैं। दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में शुमार इबोला और कोविड-19 पर शोधरत प्रसिद्ध वैज्ञानिक फोर्ट डाएट्रिक का कहना है कि अभी वायरसों के बारे में बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है।
100 साल पहले भी मास्क और सामाजिक दूरी
1918 में स्पेन से फैल फ्लू के दौरान भी हालात अभी जैसे ही थे। लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया था और सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा था। दुनियाभर में करीब 5 करोड़ लोगों की जान गई थी। 15 महीने के दौरान अकेले भारत में 1.8 करोड़ लोग मारे गए थे। कोरोना के कहर के बीच 100 साल पुरानी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।
6,828 प्रजातियों का ही नामकरण
17वीं सदी के अंत में वायरसों की खोज के बाद यह पता चला कि रेबीज और इंफ्लूएंजा जैसी बीमारियों के कारण ये विषाणु ही हैं। दशकों की मेहनत के बाद भी 6,828 प्रजातियों का नामकरण हो सका है। हालांकि, इसके मुकाबले कीटविज्ञानशास्त्रियों ने कीटों की 3,80,000 प्रजातियों का नामकरण करने में सफलता हासिल की है।