क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट प्रो. मेरवीन सिंगर बताते हैं कि बुजुर्ग लोगों में ये मशीन उतनी कारगर नहीं है। हालांकि उनकी स्थिति को देखकर इसका प्रयोग किया जा सकता है। हां इसका सबसे अधिक फायदा युवा मरीजों को होगा जो वायरस के चलते सांस की समस्या से ग्रसित होंगे।
गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर मिलना आसान
इस मशीन के शुरू होने के बाद गंभीर रोगियों को आसानी से वेंटिलेटर मिल सकेगा। वेंटिलेटर पर अगर कोई रोगी जाता है तो औसतन 10 से 21 दिन तक रहता है। कई मामलों में इतने समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद उसकी मौत हो जाती है। ऐसे में संसाधनों की बर्बादी होती है और जरूरतमंद को वेंटिलेटर नहीं मिल पाता है।