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कोरोना को लेकर चीन ने सबसे ज्यादा फैलाया दुष्प्रचार, नौ महीने के शोध में किया गया खुलासा

Tue, 16 Feb 2021 09:00 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
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आज दुनिया में लगभग हर देश में कोरोना वायरस मौजूद हैं। यह खतरनाक वायरस तेजी से लोगों को अपनी चपेट में लेता है लेकिन अभी तक इस वायरस की उत्पत्ति के बारे में किसी को नहीं पता चला। इस अफवाह को फैलने में भी तीन महीने लग गए कि कोरोना वायरस चीन से फैला एक बायो हथियार है, जिसने करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में लिया है।

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पिछले साल मार्च तक लोगों ने इस बात पर यकीन करना शुरू कर दिया था कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है बल्कि कृत्रिम है। प्यू रिसर्च सेंटर ने पाया कि तीन अमेरिकियों में से एक का मानना है कि कोरोना वायरस लैब में बनाया गया, जबकि चार में से एक का मानना है कि ये जानबूझकर किया गया।

बीजिंग से लेकर वॉशिंगटन या मॉस्को से लेकर तेहरान जैसी शक्तिशाली ताकतों ने वायरस की उत्पत्ति को लेकर और इसे लेकर बनाई गए कहानियों को गढ़ने और नियंत्रण करने में काफी मेहतन की। इन चारों देशों के उच्च अधिकारियों और मीडिया ने गलत सूचना फैलाने में खूब मदद की। 
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इन देशों ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल संदेह को बोने और राजनीतिक रूप से षडयंत्रों को बढ़ाने के लिए किया। एसोसिएट प्रेस ने अटलांटिक काउंसिल डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब के साथ मिलकर नौ महीने तक ये शोध किया कि कैसे राज्य प्रायोजित गलत सूचना का प्रसारण किया गया। 

जैसे ही महामारी ने दुनिया में कहर बरपाना शुरू किया, चीन ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर विदेशी दुष्प्रचार फैलाने को जिम्मा उठाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोरोना को महामारी घोषित करने के एक दिन बाद, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने देर रात ट्वीट्स की एक श्रृंखला तैयार की, जो कि पार्टी का कोरोना को लेकर दुष्प्रचार करने का पहला कदम माना जा सकता है।

इसके बाद झाओ को चीन के ग्लोबल टाइम्स, 30 चीनी राजनयिकों और फ्रांस से लेकर पनामा के अधिकारियों का समर्थन मिला। इसके अलावा वेनेजुएला के विदेश मंत्री और सऊदी के शाही परिवार के करीबी लोगों ने अपने खातों से झाओ का समर्थन किया और उनके विचारों को स्पेनिश और अरब भाषा में लिखकर फैलाया। 

13 मार्च को झाओ ने अपने निजी विबो पर एक संदेश जारी किया था कि आपके समर्थन के लिए शुक्रिया, हमारी मातृभूमि को बचाने के लिए खूब मेहनत करेंगे। जनवरी में, रूस ने यह सिद्धांत सबके सामने लाकर खड़ा किया कि कोरोना वायरस अमेरिका ने हथियार के तौर कोरोना वायरस का इस्तेमाल किया है। 

इसके अलावा ईरान ने भी चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ का समर्थन किया। झाओ ने ट्वीट किया कि अमेरिका ने एक हथियार के तौर पर कोरोना वायरस को बाहर निकाला है, इस पर ईरान के सुप्रीम नेता ने कहा कि कोविड-19 एक जैविक हमला हो सकता है। झाओ के बाद चीन के मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स ने भी अमेरिका को इसे लेकर घेरा। 

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