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ब्रिटेन: महामारी थमी, लेकिन थम नहीं रहा है मास्क पर जारी विवाद

Wed, 03 Nov 2021 02:48 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

जानकारों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में हुए अध्ययनों से इस बात के अधिक साक्ष्य सामने आए हैं कि मास्क पहनना संक्रमण से बचाने में कारगर है।

 
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- फोटो : wyss.harvard.edu
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विस्तार
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कोरोना महामारी की शुरुआत के समय इस पर काबू पाने के लिए सीमाएं बंद करने और लॉकडाउन के अलावा जिस उपाय को लगभग हर जगह अपनाया गया, वह मास्क पहनना अनिवार्य बनाना था। अब महामारी थमने के साथ बाकी तमाम उपायों पर विभिन्न देशों में अलग-अलग नजरिया अपनाया जा रहा है, लेकिन मास्क को अभी भी हर जगह जरूरी समझा जा रहा है। लेकिन हाल में दुनिया के कई देशों में मास्क के खिलाफ माहौल उग्र होता दिखा है। इस मुद्दे पर उन देशों में गहरे सामाजिक मतभेद पैदा हो गए हैँ।

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वैज्ञानिकों की यह साफ राय है कि मास्क महामारी रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। इससे कोरोना वायरस के संक्रमण की दर में भारी गिरावट आती है। लेकिन कई देशों में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना अनिवार्य बनाने के सरकारी आदेशों का सड़कों पर आकर विरोध कर रहे हैं।

वेल्श स्थित स्वैनसी यूनिवर्सिटी में कोविड-19 संबंधी व्यवहार के वरिष्ठ प्राध्यापक साइमन विलियम्स ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘मास्क समाज में विभाजन का प्रतीक बना हुआ है। ऐसे लोग हैं, जो मानते हैं कि इसको लेकर अत्यधिक प्रतिबंध लगा रखा गया है। दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं, जो समझते हैं कि महामारी के दौरान सरकारों ने मास्क संबंधी पर्याप्त नियम सख्ती लागू नहीं किए।’
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अलग-अलग देशों में कोरोना संक्रमण के नए दौर आने और इसकी आशंका कायम रहने की वजह से ज्यादातर देशों में अभी लोगों को मास्क पहनते रहने की सलाह दी गई है। कई देशों में सरकार ने मास्क पहनने का नियम इसलिए लागू रखा है कि अगर भविष्य में फिर जरूरत पड़ी, तो नए सिरे से इस पर अमल कराना ज्यादा कठिन होगा।

महामारी के आरंभिक दिनों में कई देशों की सरकारों, यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मास्क पहनना अनिवार्य करने में हिचक दिखाई थी। लेकिन 2020 के मध्य तक लगभग सभी देशों में मास्क पहनना आम बात बन गई। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टॉल के एयरोसोल रिसर्च सेंटर में रिसर्च फेलॉ ब्रायन बिज्देक ने सीएनएन से कहा- ‘जब हम सांसद छोड़ते हैं या बोलते हैं, तो हमारी श्वास नली में एयरोसोल पैदा होते हैँ। मास्क उनका बाहर जाना रोकता है। बड़े आकार के एयरोसोल को फिल्टर करने में मास्क बहुत प्रभावी हैं। लेकिन अपेक्षाकृत छोटे आकार के एयरोसोल को फिल्टर करने में वे उतने कारगर नहीं होते।’

जानकारों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में हुए अध्ययनों से इस बात के अधिक साक्ष्य सामने आए हैं कि मास्क पहनना संक्रमण से बचाने में कारगर है। इसके बावजूद अब इस बारे में अलग-अलग देऑशों में अलग नीतियां अपनाई जा रही हैँ। अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कोरोना महामारी के खिलाफ अपनी रणनीति में मास्क को केंद्रीय स्थान दे रखा है। अमेरिका में सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में इन्हें पहनना अभी भी अनिवार्य है। लेकिन इसको लेकर अमेरिका के कई राज्यों में प्रदर्शन हुए हैँ। कुछ जगहों पर इसके खिलाफ स्कूलों में हिंसा भी हुई है।

ज्यादातर यूरोपीय देशों में मास्क की अनिवार्यता अभी जारी है, लेकिन इसके अमल में अब काफी ढील दी जा रही है। जबकि इंग्लैंड में इस गर्मियों में ही इसे पहनना या ना पहनना लोगों की मर्जी पर छोड़ दिया गया। एशिया और अफ्रीका के ज्यादातर देशों में भी अभी इसकी अनिवार्यता जारी है। लेकिन महामारी थमने के साथ लगभग हर देश में लोग इस नियम का धड़ल्ले उल्लंघन कर रहे हैं।

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