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कोरोना ने बर्बाद की नेपाल की अर्थव्यवस्था, घरेलू उड़ान सेवाएं रद्द

Sun, 08 Mar 2020 01:17 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
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कोरोनावायरस
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कोरोनावायरस के आतंक ने जहां नेपाल की अर्थव्यवस्था को तबाह करना शुरु कर दिया है, वहीं अब वहां की घरेलू उड़ान सेवाएं भी फिलहाल बंद करने का फैसला लिया गया है। नेपाल के एयरलाइंस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने तय किया है कि लगातार घटती यात्रियों की संख्या और बढ़ते घाटे को देखते हुए घरेलू विमान सेवाओं की उड़ाने बंद कर दी जाएं।

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पिछले दो महीनों में विदेशी यात्रियों की संख्या में जबरदस्त गिरावट आई है और विमान कंपनियों के पास कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे भी नहीं हैं। एयरलाइंस कर्मचारियों को कुछ महीनों के लिए अवैतनिक छुट्टी पर भेजने का भी फैसला लिया गया है।

एसोसिएशन के प्रवक्ता योगराज कंडेल के मुताबिक घरेलू उड़ान इस्तेमाल करने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में पिछले दो महीनों के दौरान 40 फीसदी की कमी आई है। घरेलू उड़ान कंपनियां ज्यादातर अपने खर्चे के लिए विदेशी पर्यटकों पर ही निर्भर रहती हैं और उनकी संख्या तेजी से घटने की वजह से कंपनियों की आर्थिक हालत खस्ता हो गई है। एयरलाइंस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि एविएशन सेक्टर को इस साल 400 करोड़ रुपए का घाटा होगा।
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कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए तमाम देशों के पर्यटकों ने पहले से की गई अपनी बुकिंग को रद्द कर दिया है। एसोसिएशन के मुताबिक आने वाले महीनों में चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और भारत से बड़ी संख्या में पर्यटकों ने बुकिंग कराई थी, लेकिन इनमें से ज्यादातर ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है। इन देशों में कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है और आने वाले महीनों में भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे, इसलिए पर्यटक अब नेपाल नहीं आ रहे।

एसोसिएशन की बैठक में ये भी फैसला लिया गया है कि एयरलाइंस कंपनियां अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पाएंगी, इसलिए उन्हें कुछ महीनों की अवैतनिक छुट्टी पर भेज दिया जाए। अन्य कर्मचारियों के मिलने वाली तमाम सुविधाओं में भी भारी कटौती का फैसला लिया गया है।

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15880 लोगों की नौकरियां गईं, अर्थव्यवस्था को 3.6 करोड़ डॉलर का नुकसान

कोरोनावायरस की वजह से नेपाल में न सिर्फ घरेलू उड़ान कंपनियों का संकट बढ़ा है, लगभग हर सेक्टर का यही हाल है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल के अलग-अलग सेक्टर से 15880 कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

एडीबी ने कहा है कि अगर नेपाल में कोरोना का असर सबसे कम भी होता है तब भी नेपाल की जीडीपी में 0.04 फीसदी की गिरावट आनी ही है। एडीबी के मुताबिक कोरोना की वजह से एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। हर स्तर पर घरेलू मांग बेहद घटी है, चाहे वह टूरिज्म हो, बिजनेस यात्राएं हों, व्यापार या उत्पादन का क्षेत्र हो ये फिर सप्लाई में आने वाली दिक्कतें, हर मोर्चे पर असर साफ दिख रहा है।

नेपाल और एशियाई देशों में निर्माण क्षेत्र, पर्यटन, होटल, बाहरी खानपान पर खासा असर है। खासकर हर तरफ एहतियात के तौर पर जो तमाम पाबंदियां लगाई गई हैं, अर्थव्यवस्था पर ये उसी का असर है। इसलिए हर सेक्टर से नेपाल में 5210 से लेकर 15880 लोगों की नौकरियां जा सकती हैं।

एडीबी के आर्थिक प्रमुख यसुयुकी सवादा के मुताबिक तमाम एशियाई देशों में ये संकट बढ़ता जा रहा है और वहां की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और आने वाले कुछ महीनों में हालात सुधरने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
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