श्रीलंकाई सरकार ने ईस्टर पर हुए आतंकवादी हमला हमलों की संभावना के बारे में अग्रिम खुफिया जानकारी प्राप्त करने के बावजूद कार्य करने में अपनी विफलता के लिए माफी मांगी है, जिसमें 310 लोग मारे गए। 2009 में खत्म हुए विनाशकारी गृह युद्ध के बाद से देश के सबसे घातक हिंसा में तीन चर्चों और तीन उच्च-स्तरीय होटलों में पर्यटकों समेत 500 लोगों को घायल कर दिया गया।
सीएनएन ने बताया कि सरकार के प्रवक्ता रजित सेनारत्ने ने कहा कि धमाकों के बारे में चेतावनी हमलों से पहले ही मिल गई थी। 'हमने चेतावनियां देखीं और हमने दिए गए विवरणों को देखा', स्वास्थ्य मंत्री सेनारत्ने ने कहा, 'हमें बहुत खेद है, एक सरकार के तौर पर हमें इस घटना में पीड़ित परिवारों और संस्थानों से माफी मांगनी है।' उन्होंने कहा कि सभी परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और चर्चों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
हालांकि, किसी भी समूह ने हमलों के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं किया है, लेकिन पुलिस ने धमाकों के सिलसिले में एनआईजे के ज्यादातर सदस्यों - 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्हें इस हत्याकांड की आशंका है कि इससे अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसीलिए उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए रक्षा बलों के साथ सभी आवश्यक शक्तियां निहित की हैं।