सीपेक-ग्वादर बंदरगाह (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) अथॉरिटी सहित तीन विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान पाकिस्तान की संसद में जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान विपक्षियों ने आरोप लगाया कि इस योजना पर सरकार किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे रही है।
वधेयक के पारित होने के दौरान जब विपक्षी सदस्यों को इस पर बोलने का अवसर नहीं दिया गया तो हंगामा शुरू हो गया। सदस्य नेशनल असेंबली स्पीकर असद कैसर की पीठ के सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। सदस्यों ने महंगाई का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि देश में बिजली और पेट्रोल के बढ़ते दामों से आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
सीपीईसी अथॉरिटी विधेयक की अवधि समाप्त हो जाने के बाद सरकार ने इसको 120 दिन के लिए बढ़ा दिया था। इसकी अवधि पिछले साल मई में ही समाप्त हो गई थी। तबसे विपक्षियों के विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो पा रहा था। विरोधियों का आरोप है कि योजना में जो भी सवाल खड़े हो रहे हैं, उसमें वह सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं है।
पाकिस्तान और चीन को जोड़ती है सीपीईसी परियोजना
सीपीईसी चीन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जो गुलाम कश्मीर और अक्साई चिन जैसे विवादित इलाकों से होकर गुजरता है। भारत लगातार इस प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है, क्योंकि यह गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है। मुख्य तौर पर यह एक हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जो चीन के काशगर प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान में बंदरगाह, हाइवे, मोटरवे, रेलवे, एयरपोर्ट और पावर प्लांट के साथ ही दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को विकसित किया जाएगा।