चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक तरफ जहां सत्ता में तीसरे कार्यकाल की नई अवधि के लिए तैयार हैं तो दूसरी तरफ देश में केंद्रीय नेतृत्व मूल्य वृद्धि और बेरोजगारी पर संभावित अशांति को रोकने के लिए चिंतित है। नए साल में चीन के केंद्रीय नेतृत्व के सामने कई कठिन लक्ष्य हैं। कई बैठकों में देश की अर्थव्यवस्था के हालात पर चिंता जताई गई है।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की स्टेट काउंसिल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ली केकियांग ने कहा कि अर्थव्यवस्था मौजूदा दौर में ने दबावों का सामना कर रही है और अनिश्चिततता की स्थिति बढ़ी है। सीसीपी की केंद्रीय बैठक के पोलित ब्यूरो ने सरकारी कार्य रिपोर्ट के मसौदे पर चर्चा करने के लिए फरवरी के अंत में बैठक की। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की। इस बैठक में पोलित ब्यूरो ने दो अहम मुद्दों का जिक्र तक नहीं किया।
पहला- यूक्रेन पर रूसी हमले पर रुख और दूसरा- देश की आर्थिक दुर्दशा। लेकिन 2022 के लिए तय की गई प्राथमिकताएं असली कहानी बताती हैं। इनमें अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए उपाय शुरू करने, बाजार की जीवन शक्ति बढ़ाने, घरेलू मांग विस्तार और शहरीकरण बढ़ाने के मुद्दे शामिल थे। यानी चीन जो विकास दिखाता है उसे हासिल करना अभी बाकी है।
आर्थिक चुनौतियों में वित्तीय भ्रष्टाचार शामिल
चीन के पोलित ब्यूरो ने इस साल दो अन्य आर्थिक चुनौतियों का भी परोक्ष जिक्र किया जिनमें बड़े पैमाने पर वित्तीय भ्रष्टाचार से निपटना और वित्तीय सुधारों को लागू करना शामिल है। इसके अलावा उसने जो लक्ष्य रखे उनमें सुधार और खुलेपन को गहरा करने, महामारी रोकथाम व नियंत्रण में समन्वय करने और लोगों की आजीविका में सुधार लाना शामिल है। इससे पता चलता है कि शी को तीसरे कार्यकाल में कई चुनौतियों का सामना करना होगा।