अमेरिका ने कहा कि यूएस इंडो-पैसिफिक जॉइंट फोर्स एक मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए समर्पित है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी जहाजों और विमानों की सुरक्षा के लिए उचित सम्मान के साथ समुद्र और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भरना, नौकायन करना और संचालन करना जारी रखेगी।
दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन की दादागिरी बढ़ती ही जा रही है। जिसको लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, चीनी नौसेना ने 21 दिसंबर को अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर हमला कर दिया। चीनी नौसेना ने जब यह दुस्साहस दिखाया उसी दिन चीन का एक लड़ाकू विमान दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी वायु सेना के विमान के करीब आ गया। अमेरिका ने कहा कि चीन का विमान अमेरिकी विमान से मात्र 20 फीट की दूरी पर उड़ रहा था। हालांकि बाद में चीन का विमान पीछे हट गया। अमेरिका ने इसकी निंदा की थी। इतना ही नहीं पेंटागन ने इसे 'असुरक्षित युद्धाभ्यास' तक करार दिया था।
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एससीएस प्रोबिंग इनिशिएटिव के अनुसार, 21 दिसंबर को अमेरिकी सेना ने दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य के दक्षिण में संचालित होने वाले क्लार्क एयर बेस और कडेना एयर बेस से तीन P-8A समुद्री गश्ती विमान, एक RC-135V निगरानी विमान और एक E-3G हवाई प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण विमान भेजा था। अब अमेरिका का दावा है कि RC-135V को चीनी नौसेना के J-11 द्वारा इंटरसेप्ट किया गया। इस बीच, PLAN द्वारा हाल ही में शामिल किए गए विमानवाहक पोत, शेडोंग ने भी इस क्षेत्र में अभ्यास किए हैं। फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उस अभ्यास के क्रम में शेडोंग के नेतृत्व में चीनी पोत अमेरिकी पोत के पास पहुंच गया था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि दक्षिण चीन सागर में चीन की इन हरकतों को लेकर अमेरिका का कहना है कि चीन उसे उकसाने की कोशिश कर रहा है, वहीं, चीन ने इससे इनकार किया है। चीन ने इसे एक सैन्य अभ्यास बताया है।
अमेरिका ने कहा कि यूएस इंडो-पैसिफिक जॉइंट फोर्स एक मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए समर्पित है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी जहाजों और विमानों की सुरक्षा के लिए उचित सम्मान के साथ समुद्र और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भरना, नौकायन करना और संचालन करना जारी रखेगी।
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वहीं, चीन ने हाल के वर्षों में ताइवान के प्रति तेजी से आक्रामक रुख अपनाया है, जबकि अमेरिका इसका विरोध कर रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकारी अब अधिक खुले तौर पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि बीजिंग जल्द ही द्वीप पर नियंत्रण करने की कोशिश कर सकता है।