अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के चलते दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन को बड़ा झटका लगा है। चीन में औद्योगिक उत्पादन 17 साल के निचले स्तर पर आ गया है। चीन में अगस्त माह तक औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर भी पिछले साढ़े 17 साल के निचले स्तर पर आ गई है। चीन और उसकी अर्थव्यवस्था से जुड़े देशों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय हो सकता है।
बीती शताब्दी के अंत तक दुनिया की आर्थिक गतिविधियों में चीन की करीब सात फीसदी हिस्सेदारी थी इसलिए चीन में छाने वाली मंदी से पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ सकती हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि चीन का उद्योग पूरे विश्व में आपूर्ति श्रंखला से बेहद करीब से जुड़ा हुआ है। इस साल यह आंकड़ा 19 फीसदी रहने की उम्मीद है।
चूंकि चीन की अर्थव्यस्था से ही दुनिया में कई उत्पादों की कीमतें तय होती हैं। इसलिए यह मंदी बेहद खतरनाक हो सकती है। दुनिया में उत्पादित होने वाला करीब आधा स्टील, तांबा, कोयला और सीमेंट चीन चला जाता है। ऐसे में यदि चीन इन चीजों की खरीददारी बंद कर दे तो पूरी दुनिया में इनकी कीमतें लुढ़कनी तय हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के आयात में चीन की बड़ी हिस्सेदारी 16 फीसदी से ज्यादा है। चीन भारत के लिए निर्यात का 4.39 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चौथा सबसे बड़ा बाजार भी है। इसलिए चीन में आई गिरावट का भारत पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। दूसरी तरफ भारत के लिए अच्छी बात यह है कि वो चीन की कंपनियों के लिए शानदार ठिकाना बन सकता है। यानी चीन की जो कंपनियां अपने उत्पाद भारत में बेचती हैं, वह भारत में ही अपना उत्पादन शुरू कर सकती हैं। भारत को ढांचागत सुविधाओं के मामले में भी चीन की कंपनियों से मदद मिलेगी। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।