पाकिस्तान पर बढ़ते कर्ज ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी मीडिया ने कहा है कि चीन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पाक में बढ़ते राजकोषीय घाटे से कोई बड़ा वित्तीय संकट पैदा न हो। दरअसल चीन ने पाकिस्तान में भारी भरकम निवेश कर रखा है।
खासतौर से पीओके के रास्ते गुजर रहे आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में ही चीन ने 46 अरब डॉलर का निवेश किया है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा, ‘वैसे तो पाकिस्तान एक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और उसने दुनिया भर के निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
लेकिन बढ़ते सार्वजनिक ऋण और राजकोषीय घाटे से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में पाकिस्तान के कर्ज चुकाने की क्षमता को लेकर संदेह भी पैदा हो गया है।’
पाकिस्तान से जुड़ा है चीन हित
चीनी मीडिया के मुताबिक, ‘चीन-पाक आर्थिक गलियारे के तहत बड़े पैमाने पर किए गए निवेश के कारण अब चीन का भी हित जुड़ा हुआ है।
ऐसे में चीन को सुनिश्चित करना चाहिए कि पाक बड़े वित्तीय संकट में न घिरे। चीन को पाकिस्तान का सहयोग करना चाहिए जिससे जिन परियोजनाओं में चीन ने निवेश किया है वे सतत विकास का लक्ष्य हासिल कर सकें।
साथ ही पाकिस्तान अपने घाटे के स्तर को भी समायोजित कर सके।’ चीनी अखबार में पाकिस्तान की आलोचना कम ही देखने को मिलती है क्योंकि वह दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों का हिमायती है।
मंगोलिया में पैदा हुए थे ऐसे ही हालात
मंगोलिया फ्लैग
चीनी मीडिया ने कहा है कि मंगोलिया में ऐसे ही हालात पैदा हुए थे जब पिछले साल वित्तीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 15 फीसदी हो गया था। ऐसे में देश के लिए विदेशी कर्जों को चुका पाना काफी मुश्किल हो गया।
पाक मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि देश का राजकोषीय घाटा 2016-17 की पहली छमाही में बढ़कर जीडीपी का 2.4 फीसदी हो गया है। यह पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा है।
पाक सरकार राजकोषीय घाटा 2016-17 की अवधि के दौरान 3.8 फीसदी से कम रखना चाहती है।