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'भारतीय प्रतिभा को दरकिनार कर चीन कर रहा गलती'

Sat, 25 Feb 2017 05:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : file photo
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लंबे समय से भारत के खिलाफ लेख छापने वाले चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने शुक्रवार को अपने सुर बदले हैं। अखबार ने कहा है कि चीन ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारतीय विशेषज्ञों को नजरअंदाज करने की गलती की है। अखबार ने भारतीय प्रतिभाओं का लोहा मानते हुए लिखा है कि चीन को भारत की वैज्ञानिक प्रतिभाओं को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहिए। 
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अखबार का कहना है कि चीन को अपनी नवोन्मेषी योग्यता को बनाए रखने के लिए भारत के हाई-टेक हुनर को आकर्षित करना चाहिए था। लेकिन चीन ने भारतीय हुनर को नजरअंदाज करने तथा अमेरिका व यूरोप की प्रतिभाओं को अधिक अहमियत देने की गलती की है।

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा संचालित इस अखबार ने लिखा है कि चीन ने शायद भारतीय हुनरमंद लोगों को अपने यहां काम कराने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं की है। अखबार ने लिखा है कि चीन ने हाल के सालों में वैज्ञानिक और तकनीकी शोध पर अरबों डॉलर का निवेश किया, लेकिन देश की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। ऐसे में उसके यहां काम करने वाले लोगों की कमी हो रही है।
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चीन के बजाय भारत का रुख कर रही कंपनियों से परेशान है चीनी मीडिया

- फोटो : File Photo
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने उन रिपोर्टों का हवाला भी दिया जिनके मुताबिक अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी सीए टेक्नोलॉजीज ने चीन में 300 कर्मचारियों वाली अपनी शोध और विकास टीम को खत्म करके भारत में ऐसी टीम बनाई है जिसमें हाल के सालों में लगभग 2,000 वैज्ञनिक और तकनीकी पेशेवरों को शामिल किया गया है।

चीनी अखबार के मुताबिक युवा प्रतिभाओं के कारण भारत पूरी दुनिया की तकनीकी कंपनियों को अपनी तरफ ज्यादा आकर्षित कर पा रहा है। चीन के इस सरकारी अखबार ने लिखा है कि चीन उच्च तकनीकी क्षेत्र में निवेश करने वालों को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता है, क्योंकि तकनीक के क्षेत्र में देश तीसरे स्थान पर है और अमेरिका के करीब पहुंचने की जी तोड़ कोशिश कर रहा है।

‘ग्लोबल टाइम्स’ को सबसे बड़ी परेशानी इस बात से है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भी अब भारत की तरफ अपना रुख बड़ी तेजी से कर रही हैं। अखबार लिखता है कि - ‘हाल के कुछ वर्षों में, चीन के भीतर तकनीकी क्षेत्र में नौकरियों के कई अवसर पैदा हुए हैं, लेकिन अब कुछ हाई-टेक कंपनियां चीन की बजाय भारत का रुख कर रही हैं क्योंकि भारत में चीन के मुकाबले सस्ता श्रम है। भारत से उच्च तकनीकी क्षेत्र की प्रतिभाओं को आकर्षित करना चीन के लिए अपनी उन्नति शीलता बरकरार रखने का एक विकल्प हो सकता है।’
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