दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा से नाराज चीन ने एक बार फिर से अपने विरोध को और कड़े शब्दों में बयां किया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने नए लेख में कहा है कि अरुणाचल में भारत को दलाई लामा कार्ड खेलने की भारी कीमत चुकानी पडे़गी।
ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत दलाई लामा कार्ड के जरिए चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद बढ़ा रहा है। इस लेख में अरुणाचल मुद्दे पर भारतीय मीडिया की भी कड़ी आलोचना की गई है। आई जून द्वारा लिखे गए लेख में कहा गया है कि अरुणाचल में छह जगहों के नाम बदलने से भारतीय मीडिया में उत्तेजना पैदा हो गई है।
लेख में दिल्ली आधारित सेंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च के प्रोफेसर ब्रह्मा चेलानी के उस ट्वीट पर भी विरोध जताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मूर्ख चीन अरुणाचल के छह जगहों पर अपना दावा ठोक रहा है लेकिन इसके खुद की जगहों का नामकरण ही नहीं हुआ है। ग्लोबल टाइम्स ने चेलानी इन तर्कों को बेतुका करार दिया है। ग्लोबल टाइम्स की तरफ से ये भी कहा गया है कि अरुणाचल के जिन छह जगहों का उसने नामकरण किया है वो चीन के ऐतिहासिक हिस्से हैं। ऐसे में चीन द्वारा इन हिस्सों का नामकरण पूरी तरह से वैध है। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने भी कहा है कि अरुणाचल प्रदेश के 6 क्षेत्रों के नामकरण का चीन के पास अधिकार है।
कांग ने दावा किया कि जो नाम इस्तेमाल किये गए वे उन क्षेत्रों में पीढ़ियों से रहने वाली मोम्बा जनजातियों और तिब्बती चीनियों द्वारा उपयोग किये जाते रहे हैं। भारतीय पक्ष से मिले जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए लू कांग ने कहा कि भारत-चीन सीमा के पूर्वी क्षेत्र के बारे में चीन की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट और स्थिर है।
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शिमला समझौता अवैध
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चीनी मीडिया के लेख में शिमला समझौते को अवैध बताते हुए उल्लेख किया है कि ब्रिटिश भारत और स्थानीय तिब्बत प्रतिनिधियों ने अवैध शिमला समझौता करके मैकमोहन रेखा बनाई, जिसके बाद दक्षिणी तिब्बत क्षेत्र के 90 वर्ग किलोमीटर हिस्से को ब्रिटिश भारत को दे दिया गया।
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भारत सिर्फ इस वजह से इन हिस्सों पर दलाई लामा के कहने भर से अपना हक नहीं जता सकता। इस लेख में भारत पर देशांतरण और क्षेत्र में सैन्य निर्माण का भी आरोप लगाया गया है। चीन मीडिया की तरफ से कहा गया है कि दलाई लामा की भारत यात्रा राजनैतिक यात्रा थी।
इस लेख में भारत को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि भारत को इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्यों चीन ने दक्षिणी तिब्बत के क्षेत्रों के वैध नामों की घोषणा की है। दलाई लामा कार्ड भारत के लिए बेहतर नहीं है। अगर भारत इस तरह के तुच्छ खेल को फिर खेलता है तो उसे इसके बड़े परिणाम भुगतने होंगे।
अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग: भारत
बता दें कि 4 अप्रैल से भारत और चीन के बीच शुरू हुआ तनाव अभी जारी है। इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी करते हुए कहा था कि तिब्बती धर्म गुरू दलाई लामा की भारत यात्रा से सीमा विवाद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मामले से खार खाए बैठे चीन ने बदला लेने के लिए चीन ने अरुणाचल के छह शहरों के नाम बदल दिए। हालांकि भारत ने चीन के इस कदम की कड़ी आलोचना की। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।
गौरतलब है कि चीन ने बुधवार को इस बात का ऐलान किया था कि उसने अरुणाचल प्रदेश की छह जगहों के आधिकारिक नामों का मानकीकरण कर दिया है। उसने अपनी इस पहल को वैध करार दिया था। चीन दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा से नाराज है। इस यात्रा को सही ठहराने के भारत के कदम के बाद ही चीन ने अरुणाचल की जगहों का नामकरण किया था।