रिपोर्ट में आगे कहा गया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बात पर गंभीरती से विचार करना चाहिए कि नई दिल्ली और बीजिंग के संबंधों में सुधार करना एक प्रभावी तरीका हो सकता है जिसकी सहायता से वह अतिरिक्त अंक स्कोर कर सकते हैं।
यदि देश आर्थिक विकास को अपने मैलिक लक्ष्य के रूप में मानता है तो चीन और भारत के रिश्तों में संबंधों के सुधार से ज्यादा फायदा मिल सकता है। आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नई दिल्ली में रोजगार उत्पन्न करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। भले ही चीनी खतरा भाजपा के लिए फायदेमंद हो लेकिन यह एक दुधारी तलवार भी है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जब बात कूटनीती पर आती है तो भाजपा की विचारधारा राष्ट्रवादी हो जाती है। जैसा कि पाकिस्तान के साथ नई दिल्ली के निरंतर विवादों और दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में चीन की अगुआई वाली बेल्ट एंड रोड पहल के विकास को बाधित करने के रूप में दिखाया गया है।
गौरतलब है कि भाजपा ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2018 के तहत अपने कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग के उद्देश्य से बुकलेट आदि तैयार किए हैं। इनमें बताया गया है कि चीन और पाकिस्तान दोनों न्यूक्लियर पावर हैं और दोनों देश भारत को ग्लोबल पावर बनने से रोकने के लिए नजदीकी राजनीतिक संबंध बना रहे हैं। यह बुकलेट 13 जून को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने रिलीज की थी। इसमें यह भी बताया गया है कि चीन भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है।