चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे बड़ी बांध परियोजना जैम हाइड्रोपावर स्टेशन की मंगलवार को शुरुआत की। 1.5 अरब डॉलर वाली इस परियोजना ने भारत में पानी की आपूर्ति में बाधा की आशंका संबंधी चिताएं बढ़ा दी हैं।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ का कहना है कि मध्य चीन क्षेत्र के बड़े हाइड्रोपावर कॉन्ट्रेक्टर गेझोउबा ग्रुप ने मंगलवार को सभी छह स्टेशन यूनिट को पावर ग्रिड में शामिल कर दिया।
ग्याका काउंटी स्थित जैम हाइड्रोपावर स्टेशन को जांग्मू हाइड्रोपावर स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है। यह स्टेशन ब्रह्मपुत्र नदी के प्रचुर जल संसाधन का प्रयोग करेगा जो तिब्बत में यारलुंग जांग्बो नदी के नाम से जानी जाती है।
विश्व में सबसे ऊंचा हाइड्रोपावर स्टेशन
इस बांध को विश्व में सबसे ऊंचा हाइड्रोपावर स्टेशन और अपनी तरह का सबसे बड़ा स्टेशन माना जा रहा है जो एक साल में 2.5 अरब किलोवाट-घंटा बिजली का उत्पादन करेगा।
कंपनी का कहना है कि यह मध्य तिब्बत की बिजली की कमी को दूर कर देगा और बिजली संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के विकास में भूमिका अदा करेगा।
यह मध्य तिब्बत का महत्वपूर्ण ऊर्जा का आधार भी होगा। शिन्हुआ की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि जब गर्मियों के मौसम में अधिक बिजली होगी तो इसका कुछ हिस्सा पड़ोस के क्विंघाई क्षेत्र को भेजा जाएगा।
चीन की इस परियोजना से जुड़ी खास बातें
ब्रह्मपुत्र
तिब्बत क्षेत्र में मानसरोवर के पास चेमायुंग दुंग नामक हिमवाह से उत्पन्न
तिब्बत में सांपो, अरुणाचल में डिहं, असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से प्रचलित
तिब्बत से भारत और यहां से बांग्लादेश तक बहने वाली 2900 किमी की नदी
चीन में यारलुं जांगबों नाम से मशहूर
चीन की कोशिश
विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर बांध का निर्माण, साल में 2.5 अरब किलोवाट घंटे बिजली उत्पादन का लक्ष्य
जिएशू, जांगमू, जियाचा जैसे एक दूसरे से 25 किमी दूरी पर तीन बांध
जम हाइड्रोपॉवर की सभी छह इकाईयों का समावेश और पॉवर ग्रिड से जोड़ना
भारत की चिंता
ब्रह्मपुत्र की जलापूर्ति में व्यवधान आएगा
अरुणाचल की सियांग, लोअर सुहांसी परियोजना प्रभावित होगी
2013 में विदेश मंत्रालय के अंतरमंत्रालयी समूह ने दिया था निगरानी पर जोर
सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ेंगे