फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

BRICS घोषणापत्र में जैश-ए-मोहम्मद का नाम, मसूद पर बैन के सवाल पर चीन ने साधी चुप्पी

Tue, 05 Sep 2017 02:43 PM IST
अमर उजाला डिजिटल ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में पहली बार पाकिस्तान के आतंकी समूहों का नाम शामिल किया जाना भारतीय कूटनीति खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बड़ी जीत है। पीएम इससे पहले जी -20 से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक के हर बहुपक्षीय मंच से आतंकवाद पर दुनिया के दोहरे मापदंड पर हमला बोल चुके हैं। 
विज्ञापन


पिछले साल गोवा में ब्रिक्स के आठवें शिखर सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खतरे के संदर्भ में पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी लेकिन चीन के अड़ियल रवैये से यह संभव नहीं हो पाया था। उस अधूरे काम को भारत ने चीन में पूरा कर दिखाया। इससे चीन पर भारी दबाव पड़ेगा कि वह जैश के सरगना और मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने में अड़ंगा न लगाए।

पढ़ेंः- BRICS: भारत ने शियामेन में चुकाया चीन से गोवा का बदला

घोषणापत्र में जैश और लश्कर का नाम लिए जाने से सिर्फ पाकिस्तान की ही कलई नहीं खुली है बल्कि चीन का दोमुंहापन भी उजागर हुआ है। अब उसके लिए आतंकवाद पर पाकिस्तान का बचाव करना आसान नहीं होगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वह मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई के भारत की कोशिशों का भी विरोध नहीं कर पाएगा क्योंकि ब्रिक्स घोषणापत्र के मद्देनजर ऐसा करने से उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी।
विज्ञापन


पिछले साल मसूद अजहर के खिलाफ भारत की कोशिश को नाकाम करने के बाद चीन इस साल भी अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के ऐसे ही एक प्रस्ताव को रोक चुका है। अब अक्तूबर में इसकी समीक्षा होने वाली है। माना जाता है कि चीन इसका विरोध नहीं कर पाएगा और आखिरकार भारत की कोशिशें रंग लाएंगी। मालूम हो कि भारत के दबाव में अमेरिका ने हाल ही में हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकी घोषित कर चुका है। इस लिहाज से ब्रिक्स घोषणापत्र के रूप में उसे दूसरी कामयाबी मिली है।

पढ़ेंः- शांति, विकास के लिए एक-दूसरे का साथ जरूरी : मोदी

चीन ने साधी चुप्पी 
घोषणापत्र में पाकिस्तान के आतंकी समूहों का नाम शामिल किए जाने के बावजूद चीन ने मसूद अजहर पर पाबंदी और कार्रवाई के मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। संवाददाताओं द्वारा बार-बार पूछे जाने पर सिर्फ यही जवाब मिला कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में हमारा स्टैंड स्पष्ट है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि उन्हें घोषणापत्र नहीं देखा है और उसके विषय में कुछ नहीं बोलेंगे। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें