चीन ने नेपाल को सरकार यह संदेश दिया है कि ‘दूसरे आंतरिक या बहरी पहलुओं’ के कारण उसकी वन चाइना नीति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यह संदेश हाल में कई अमेरिकी अधिकारियों की नेपाल यात्रा के बाद बने माहौल के बीच दिया गया है। पिछले दिनों अमेरिका की मानवाधिकार उप मंत्री उज़रा ज़ेया नेपाल यात्रा पर आई थीं। उस दौरान उन्होंने यहां तिब्बती शरणार्थियों से भी मुलाकात की। वन चाइना नीति का मतलब यह है कि नेपाल तिब्बत या ताइवान को चीन के अभिन्न अंग के रूप में देखता है।
उजरा जेया ने 20 से 22 मई तक नेपाल की यात्रा की थी। उनकी यात्रा से ठीक पहले नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जेया यहां तिब्बती शरणार्थियों से मिलेंगी या नहीं, इस बारे में उसे कोई सूचना नहीं है। चीनी दल के साथ बातचीत के दौरान नेपाली पक्ष ने जोर दिया कि नेपाल वन चाइना नीति में यकीन करता है। अपनी जमीन का अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ इस्तेमाल की इजाजत ना देने के प्रति भी वह वचनबद्ध है। बैठक में शामिल रहे अधिकारी ने बताया- ‘चीनी पक्ष ने नेपाल की इस वचनबद्धता की सराहना की।’
टीकाकारों के मुताबिक हाल के महीनों में अमेरिका ने नेपाल में काफी दिलचस्पी दिखाई है। इससे चीन की चिंता बढ़ी है। जब नेपाल में अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने को लेकर विवाद चल रहा था, तब दो बार चीन ने इस बारे में नेपाल को चेतावनी दी थी।
इसके मुताबिक ओली ने कहा कि नेपाल ने हमेशा ही अपने राष्ट्रीय हित और तटस्थ विदेश नीति को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा- ‘हमने गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति अपनाई हुई है। ज़ेया का नेपाल की जमीन पर तिब्बती शरणार्थी शिविर में जाना हमारी विदेश नीति का उल्लंघन है।’
बताया जाता है कि नेपाल-चीन बाइलेटरल कंसल्टेटिव मेकैनिज्म की बुधवार को हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने चीन की सहायता से नेपाल में बन रही परियोजनाओं की स्थिति और अन्य मसलों पर बातचीत की। ये परियोजनाएं चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं।