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पशोपेश में काठमांडो: वन चाइना पॉलिसी को लेकर चीन ने नेपाल सरकार को किया आगाह

Fri, 27 May 2022 05:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

हाल के महीनों में अमेरिका ने नेपाल में काफी दिलचस्पी दिखाई है। इससे चीन की चिंता बढ़ी है। जब नेपाल में अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने को लेकर विवाद चल रहा था, तब दो बार चीन ने इस बारे में नेपाल को चेतावनी दी थी...
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Nepal: पीएम देउबा के साथ उजरा जया - फोटो : Agency
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विस्तार
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चीन ने नेपाल को सरकार यह संदेश दिया है कि ‘दूसरे आंतरिक या बहरी पहलुओं’ के कारण उसकी वन चाइना नीति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यह संदेश हाल में कई अमेरिकी अधिकारियों की नेपाल यात्रा के बाद बने माहौल के बीच दिया गया है। पिछले दिनों अमेरिका की मानवाधिकार उप मंत्री उज़रा ज़ेया नेपाल यात्रा पर आई थीं। उस दौरान उन्होंने यहां तिब्बती शरणार्थियों से भी मुलाकात की। वन चाइना नीति का मतलब यह है कि नेपाल तिब्बत या ताइवान को चीन के अभिन्न अंग के रूप में देखता है।  

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चीन ने यह संदेश नेपाल-चीन बाइलेटरल कंसल्टेटिव मेकैनिज्म की 14वीं बैठक के दौरान दिया। इस बैठक में शामिल दो नेपाली अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है। उनमें से एक अधिकारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट को बताया- ‘चीनी पक्ष ने उज़रा ज़ेया की मुलाकात का सीधे जिक्र नहीं किया। लेकिन उसने जो संदेश दिया, वह स्पष्ट है।’ इस मेकैनिज्म की बैठक में नेपाली दल का नेतृत्व वहां के विदेश सचिव भरत राज पौडयाल और चीनी दल का नेतृत्व वहां के उप विदेश मंत्री वू जियागहो ने किया।

नेपाल ने जताई वचनबद्धता

उजरा जेया ने 20 से 22 मई तक नेपाल की यात्रा की थी। उनकी यात्रा से ठीक पहले नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जेया यहां तिब्बती शरणार्थियों से मिलेंगी या नहीं, इस बारे में उसे कोई सूचना नहीं है। चीनी दल के साथ बातचीत के दौरान नेपाली पक्ष ने जोर दिया कि नेपाल वन चाइना नीति में यकीन करता है। अपनी जमीन का अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ इस्तेमाल की इजाजत ना देने के प्रति भी वह वचनबद्ध है। बैठक में शामिल रहे अधिकारी ने बताया- ‘चीनी पक्ष ने नेपाल की इस वचनबद्धता की सराहना की।’

टीकाकारों के मुताबिक हाल के महीनों में अमेरिका ने नेपाल में काफी दिलचस्पी दिखाई है। इससे चीन की चिंता बढ़ी है। जब नेपाल में अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने को लेकर विवाद चल रहा था, तब दो बार चीन ने इस बारे में नेपाल को चेतावनी दी थी।

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इस बीच उजरा जेया की नेपाल में जो गतिविधियां रहीं, उसे लेकर देश के अंदर भी विवाद खड़ा होता दिख रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के प्रमुख केपी शर्मा ओली ने आरोप लगाया है कि ज़ेया ने तिब्बती शरणार्थियों को उकसाने की कोशिश की। अपनी पार्टी के संसदीय दल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जेया ने नेपाल की विदेश नीति के उसूलों और नियमों का उल्लंघन किया। यूएमएल पार्टी के चीफ ह्विप विशाल भट्टाराई ने इस बैठक के बारे में जानकारी दी।

गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति पर जोर

इसके मुताबिक ओली ने कहा कि नेपाल ने हमेशा ही अपने राष्ट्रीय हित और तटस्थ विदेश नीति को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा- ‘हमने गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति अपनाई हुई है। ज़ेया का नेपाल की जमीन पर तिब्बती शरणार्थी शिविर में जाना हमारी विदेश नीति का उल्लंघन है।’

बताया जाता है कि नेपाल-चीन बाइलेटरल कंसल्टेटिव मेकैनिज्म की बुधवार को हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने चीन की सहायता से नेपाल में बन रही परियोजनाओं की स्थिति और अन्य मसलों पर बातचीत की। ये परियोजनाएं चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं।

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