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आठ माह तक इनकार के बाद चीन का कुबूलनामा, गलवां में मारे गए थे दो कमांडरों समेत चार सैनिक

Fri, 19 Feb 2021 12:17 PM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली/बीजिंग।

सार

  • एक और सैनिक की अपने कमांडर को बचाने के चक्कर नदी में डूबने से गई थी जान
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Galwan Vally Satellite Photo - फोटो : Maxar
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विस्तार
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चीन ने आठ महीने बाद पहली बार पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प में अपने सैनिकों के मारे जाने की बात कुबूली है। बीते साल जून में हुई झड़प में अपने सैनिकों के हताहत होने से लगातार इनकार करने वाले चीन ने अब माना है कि गलवां में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दो सैन्य कमांडरों समेत चार सैनिक मारे गए थे। साथ ही गलवां में  एक और चीनी सैनिक की मौत अपने कमांडर को बचाने के चक्कर में नदी में डूबने से हो गई थी।

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चीनी सेना के आधिकारिक अखबार पीएलए डेली के मुताबिक, काराकोरम के पहाड़ों में तैनात पीएलए के इन अफसरों और सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) ने अब आधिकारिक तौर पर की है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी पीएलए डेली की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि मारे गए अफसरों में पीएलए की शिनजियांग सैन्य कमान के रेजिमेंटल कमांडर क्वी फेबाओ भी थे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली सीएमसी ने फेबाओ को हीरो का दर्जा दिया है। फेबाओ के अलावा बटालियन कमांडर चेन हांगजुन को सीमा की रक्षा करने वाले हीरो और चेन शियांगरांग, शियाओ सियुयान और वैंग झुआरन को प्रथम श्रेणी सम्मान से नवाजा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से चार ने अपनी जान भारतीय सैनिकों के साथ झड़प में गंवाई थी, जबकि झुआरन को झड़प के दौरान अफसरों को बचाने के चक्कर में नदी पार करते वक्त अपनी जान गंवानी पड़ी। चीन की यह स्वीकारोक्ति तब आई है, जब पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों से दोनों ही देशों के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालांकि भारतीय सैन्य सूत्रों ने एक बार फिर दावा किया है कि गलवां घाटी में चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। उत्तर कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने तीन दिन पहले ही कहा था कि गलवां में चीनी सैनिकों को अपने करीब 50 गंभीर रूप से घायल सैनिकों को वाहनों में लादकर ले जाते देखा गया था।
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अमेरिका ने 35, रूस ने 45 चीनी सैनिकों के मारे जाने की दी थी जानकारी
गलवां घाटी की घटना के बाद भारत ने फौरन ही हताहतों की संख्या बता दी थी, जबकि चीन इससे बचता रहा था। यहां 15 जून को हुई झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे। पिछले वर्ष अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गलवां की झड़प में चीन के 35 सैन्यकर्मी मारे गए थे। वहीं, रूसी समाचार एजेंसी तास ने भी 10 फरवरी को बताया था कि झड़प में चीन के 45 सैनिक मारे गए थे।

तब चीन ने बोला था सफेद झूठ, कहा था कि हमारे पास कोई जानकारी नहीं
बीते साल 17 जून को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने अपने सैनिकों के मरने के सवाल के जवाब में कहा था कि दोनों देशों के सैनिक जमीनी स्तर पर खास मसलों को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जिसे यहां बताया जाए। मेरा मानना है और आपने भी इसे देखा होगा कि जब से यह (गलवां घाटी झड़प) हुआ है, तब से दोनों पक्ष बातचीत से विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सरहद पर शांति बहाल हो सके।

अब चीन की सफाई...संबंध खराब न हों, इसलिए नहीं बताए नाम
अब चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, गलवां झड़प के बाद चीन ने तनाव को घटाने के लिए संयम बरता था। उसने इसलिए सैनिकों के नाम नहीं बताए ताकि दोनों देशों के बीच संबंध खराब न हों। चुनयिंग ने कहा, लोगों को सच के बारे में जानना जरूरी था, इसलिए सच्चाई सामने आने में वक्त लगा। हमें उम्मीद है कि हमारे द्विपक्षीय रिश्तों में सीमा का मसला उचित जगह पर रखना होगा। उम्मीद है कि भारतीय पक्ष भी उचित तरीके से समस्या को सुलझाने के लिए काम करेगा। भारत चीन का अहम पड़ोसी है। ऐसे में स्वस्थ और स्थायी संबंध कायम करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा।

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पिछले दिनों भारतीय सेना की उत्तरी कमान के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने बताया था कि गलवां घाटी की झड़प के बाद 50 चीनी सैनिकों को वाहनों के जरिए ले जाया गया था। झड़प में चीनी सेना के काफी सैनिक मारे गए थे। जनरल जोशी के अनुसार चीनी सैनिक 50 से ज्यादा जवानों को वाहनों में ले जा रहे थे। मगर वे घायल थे या उनकी मौत हो चुकी थी इसके बारे में कहना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि रूसी न्यूज एजेंसी टीएएसएस ने चीन के 45 जवानों के मारे जाने की बात कही है और हमारा अनुमान भी इसी के आसपास का है। बता दें कि पिछले साल जून में गलवां घाटी में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। वहीं चीन के भी काफी सैनिक मारे गए थे लेकिन उसने इस लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।

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