चीन में बेल्ट एंड रोड परियोजना (बीआरआई) का दूसरा सम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें वो देश शिरकत करेंगे जो इस परियोजना से जुड़े हैं। लेकिन इसी बीच चीन ने बीआरआई की वेबसाइट से उस नक्शे को हटा लिया है, जिसमें पूरे जम्मू-कश्मीर (पीओके भी शामिल) और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताया गया था।
बता दें इस परियोजना का मकसद दुनियाभर में चीन के निवेश से बुनियादी परियोजनाओं का विकास करना और चीन के प्रभुत्व को बढ़ाना है। साथ ही एशिया के देशों को चीन द्वारा प्रायोजित परियोजना के माध्य से जोड़ना है। जिसे चीनी 21वीं सदी का 'सिल्क रूट' कहते हैं।
जब ऐसी कई रिपोर्ट आईं कि इस नक्शे में चीन के पुराने व्यवहार के उलट जानकारी दिख रही है, तो इस नक्शे को ही हटा लिया गया। इसके अलावा इस नक्शे में भारत को भी बीआरआई परियोजना में शामिल बताया गया था। जबकि भारत इस परियोजना का विरोध करता रहा है।
क्योंकि इसके तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पाओके) में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का निर्माण किया जा रहा है। भारत पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का ही हिस्सा मानता है। ऐसे में भारत की इजाजत के बिना चीन वहां इस परियोजना पर काम कर रहा है। जो कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन है।
वहीं भारत ने बीजिंग में तीन दिन तक चलने वाले बीआरआई के दूसरे सम्मेलन का भी बहिष्कार किया है। इस बार इसमें 37 देश शामिल हो रहे हैं। चीन के कहने के बावजूद साल 2017 में हुए इसके पहले सम्मेलन में भी भारत शामिल नहीं हुआ था।
इससे पहले चीन ने ऐसे हजारों नक्शे भी नष्ट कर दिए हैं, जिनमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का भाग बताया गया था। बता दें चीन अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र का हिस्सा मनता है और उसे दक्षिणी तिब्बत कहता है।