चीन ने अमेरिकी राज्य मिसौरी की तरफ से कोरोना वायरस को लेकर उसके खिलाफ दायर मुकदमे को मूर्खतापूर्ण बताया है। चीन ने इसे संप्रभुत्ता का उल्लंघन करार देते हुए बुधवार को खारिज कर दिया।
इस मुकदमे में चीन पर कोविड-19 से जुड़ी जानकारी छिपाने और इससे आगाह करने वालों को गिरफ्तार करके दुनिया को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट मिसौरी की एक अदालत में मिसौरी के अटॉर्नी जनरल एरिक शिमिट की ओर से चीन की सरकार, वहां की सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य चीनी अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ अपनी तरह का पहला मुकदमा दायर किया गया है।
चीन पर आरोप
- कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने के शुरुआती अहम सप्ताहों में चीन के अधिकारियों ने जनता को धोखा दिया।
- चीन ने जरूरी जानकारियों को दबाया।
- चीन ने इस बारे में जानकारी सामने लाने वालों को गिरफ्तार किया।
- चीन ने पर्याप्त प्रमाण होने के बावजूद मानव से मानव में संक्रमण की बात से इनकार किया।
- चीन ने महत्वपूर्ण चिकित्सकीय अनुसंधानों को खत्म किया।
- चीन ने लाखों लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण की जद में आने दिया।
- चीन ने निजी सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) की जमाखोरी की जिससे महामारी वैश्विक हो गई।
याचिका में चीन के खिलाफ लगे ये आरोप
- चीन के खिलाफ एक आरोप जनजीवन बाधित करने का लगाया गया है।
- एक आरोप असाधारण तरीके से खतरनाक गतिविधि करने का लगाया गया है।
- दो आरोप कर्तव्य के निर्वहन में खामी के लगाए गए हैं।
इस मुकदमे पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, ‘‘कथित आरोपों में कोई तथ्य और कानूनी आधार नहीं है। यह कुछ नहीं केवल मूर्खता है।
बचाव में उन्होंने दोहराया कि महामारी की शुरुआत से ही चीनी सरकार ने खुली, पारदर्शी और जिम्मेदारीपूर्वक घटना की जानकारी अमेरिका, अन्य देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को दी। इसके अलावा वायरस का सामान्य अनुक्रमण जारी किया।