अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक चीन आगामी दस वर्षों में अपने एटमी हथियार शस्त्रगार का आकार दोगुना करने पर आमादा है अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जेम्म एच. एंडरसम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ऐसे में रूस और अमेरिका के साथ हथियार नियंत्रण संधि में चीन का शामिल होना जरूरी है।
चीन की तैयारी
चीन अपने वॉक हैड में लगातार नए हथियार जोड़ता जा रहा है। चीन फिलहाल डीएफ-31एजी और डीएफ-41 अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों के नए स्वरूप का विकास कर रहा है। उसका डीएफ-17 सिस्टम हाइपरसोनिक मिसाइल को भी परमाणु उपकरण ले जाने में सक्षम है। यही नहीं, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (पीएलएआरएफ) परमाणु हथियार संख्या भी अमेरिका और रूस से कम नहीं है।
बहुपक्षीय वार्ता पर है भरोसा : चीनी प्रवक्ता
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने अड़ते हुए कहा कि चीन सभी पक्षों के साथ काम करना जारी रखेगा। परमाणु हथियारों वाले पांच देशों में चीन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन शामिल हैं और उनके बीच परमाणु हथियारों के लिए अप्रसार (एनपीटी) संधि है। ऐसे में चीन बहुपक्षीय वार्ता को प्रोत्साहित करेगा, लेकिन द्विपक्षीय अथवा त्रिपक्षीय समझौते को नहीं।