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Pakistan: अपने रिएक्टरों की क्षमता को जांचने के लिए पाकिस्तान को 'गिनी-पिग' बना रहा है चीन

Wed, 05 Jul 2023 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान के साथ हुए करार के तहत चीन चाश्मा नामक जगह पर 1,200 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का संयंत्र लगाएगा। चीन का दावा है कि पहली बार अपने पूरी अपने देश में निर्मित रिएक्टर- हुआलोंग वन लगाएगा...
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Nuclear reactor - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन ने पाकिस्तान के साथ परमाणु सहयोग बढ़ाने की जो पहल की है, उससे पाकिस्तान को कितना लाभ होगा, विशेषज्ञों के बीच यह सवाल चर्चित हो गया है। अब तक परमाणु बिजली के क्षेत्र में पश्चिमी और रूसी कंपनियों का दबदबा रहा है। अब चीन इस क्षेत्र में पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रयास का संबंध पाकिस्तान से ज्यादा चीन की अपनी रणनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं से है।

अमेरिकी थिंक टैंक कारनेगी एन्डॉवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलॉ मार्क हिब्स ने कहा है- ‘चीन पाकिस्तान में परमाणु बिजली संयंत्र अपनी क्षमता को साबित करने के लिए लगा रहा है, ताकि चीनी कंपनियों को अधिक फायदेमंद और खुले परमाणु बिजली बाजार में प्रवेश का मौका मिल सके।’ हिब्स परमाणु संबंधी मामलों के विशेषज्ञ हैं।

पाकिस्तान के साथ हुए करार के तहत चीन चाश्मा नामक जगह पर 1,200 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का संयंत्र लगाएगा। चीन का दावा है कि पहली बार अपने पूरी अपने देश में निर्मित रिएक्टर- हुआलोंग वन लगाएगा। यह तीसरी पीढ़ी का प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर है, जिसे चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन और चाइना जनरल न्यूक्लियर पॉवर ग्रुप ने मिल कर विकसित किया है। चाश्मा में इसके पहले चीन ने परमाणु बिजली संयंत्र परिसर बनाया था, जिसमें चार रिएक्टर लगे हुए हैं। वहां अभी 1,230 मेगावाट बिजली पैदा होती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक गुजरे वर्षों में चीन परमाणु रिएक्टरों का एक बड़ा उत्पादक बन गया है। लेकिन पाकिस्तान के बाहर किसी अन्य देश को अभी तक रिएक्टरों को बेचने का मौका नहीं मिला है। जबकि इस क्षेत्र में चीन ने ऊंची महत्त्वाकांक्षा पाल रखी हैं। चीनी अधिकारियों ने कहा है कि साल 2030 तक चीन लगभग 30 देशों में रिएक्टर लगा चुका होगा। ये देश वो हैं, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं। पिछले साल चीन ने अर्जेंटीना में परमाणु संयंत्र लगाने के एक करार पर दस्तखत किया था।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि चाशमा परिसर में नए रिएक्टर के लिए हुए करार का मकसद पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। इस परियोजना में चीन 3.48 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा।

अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में फेलॉ जोंगगिआन जो लिउ ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि चीन के पास परमाणु रिएक्टरों का निर्यात करने का ज्यादा अनुभव नहीं है। उसने 2021 के बाद से जाकर विदेशों में परमाणु रिएक्टर लगाने को प्राथमिकता दी है। तब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त राष्ट्र में एलान किया था कि अब भविष्य में चीन विदेशों में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र नहीं लगाएगा।  

लिउ ने कहा- ‘इस नजरिए से देखें, तो चीन से रिएक्टर लेना फायदेमंद नहीं है, क्योंकि चीनी निर्यातक ऊंचे मार्कअप चार्ज वसूलते हैं। चीन के लिए फिलहाल अहम दुनिया को यह दिखाना है कि वह अपनी देसी तकनीक से सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती रिएक्टर बना सकता है।’ विशेषज्ञों के मुताबिक अपनी क्षमता प्रदर्शन के लिए चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है।

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