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बाज नहीं आए पाकिस्तान और चीन, बैठक में जम्मू-कश्मीर का भी उठा मुद्दा

Fri, 21 Aug 2020 11:16 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
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चीन-पाकिस्तान
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चीन और पाकिस्तान के बीच दूसरी सालाना रणनीतिक वार्ता शुक्रवार को संपन्न हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने सर्वकालिक द्विपक्षीय समझौतों को और बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की। इस वार्ता में कश्मीर मुद्दे के साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) और अफगान शांति प्रक्रिया पर भी बात हुई।

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इस दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी ने कई मामलों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस बैठक को दक्षिणी द्वीप हैनान में आयोजित बैठक से पहले अत्यधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।


वार्ता संपन्न होने के बाद दोनों देशों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने कहा कि एक शांतिपूर्ण, स्थायी, सहयोगात्मक और समृद्ध दक्षिण एशिया सभी पक्षों के हित में है। सभी दलों को समानता और आपसी सम्मान के आधार पर वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने की जरूरत है। 
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'कश्मीर मामले को वार्ता से हल करने की जरूरत'
बैठक के दौरान पाकिस्तान ने चीन के सामने जम्मू-कश्मीर में स्थिति की जानकारी दी। इस दौरान उसने अपनी चिंताओं, स्थिति और वर्तमान में आवश्यक मुद्दों को चीन के सामने रखा। चीन ने इस मामले में किसी भी तरीके की एकपक्षीय कार्रवाई का विरोध किया। 

भारत यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी करने का चीन को कोई अधिकार नहीं है। कश्मीर मामले में दखल देने पर भारत ने पहले भी चीन से कहा था कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था और रहेगा। जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। 

चीन ने दोहराया कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच इतिहास से बचा हुआ एक विवाद है। उसने कहा कि इस विवाद को संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संबंधित सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से शांतिपूर्वक और उचित तरीके से ही हल किया जाना चाहिए।

अल्वी देते हैं चीन-पाक संबंधों को महत्व : जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति को एक मौखिक संदेश भेजा। इसमें जिनपिंग ने बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत सीपीईसी परियोजना को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग साझेदारी को बढ़ावा देने में इसका बहुत महत्व है।

सीपीईसी की राजनीतिक दल संयुक्त विमर्श प्रक्रिया के दूसरे सम्मेलन के आरंभ हुआ है। इस मौके पर पाक के राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए बधाई संदेश के जवाब में शी ने कहा कि यह स्पष्ट दिखता है कि अल्वी चीन-पाकिस्तान संबंधों को बहुत महत्व देते हैं तथा सीपीईसी के निर्माण का समर्थन करते हैं।

चीन के संसाधन संपन्न शिनजियांग प्रांत को पाक के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाली 60 अरब डॉलर की सीपीईसी कई अरब डॉलर की महत्वपूर्ण परियोजना है। पाक के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरने वाली इस परियोजना पर भारत ने आपत्ति जताई है।

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