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चीन का जवाब: 'बेटर कॉटन इनिशिएटिव' के मुकाबले 'वेलई कॉटन' प्रोजेक्ट लॉन्च किया

Thu, 15 Apr 2021 04:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

स्विट्जरलैंड स्थित बेटर कॉटन इनिशिएटिव की शुरुआत 2009 में हुई थी। उसका मकसद कॉटन उद्योग में अच्छे व्यवहार को बढ़ावा देना है। लेकिन चीन ने इसके मुकाबले के लिए  'वेलई कॉटन' नाम से मुहिम चलाई है...
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कॉटन - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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जबरिया मजदूरी के आरोप में पश्चिमी देशों में शिनजियांग प्रांत में तैयार कॉटन के बहिष्कार की जारी मुहिम के जवाब में चीन अब अपना मानक तैयार करने जा रहा है। यूरोपीय देशों ने शिनजियांग में तैयार कॉटन के बायकॉट की मुहिम स्विट्जरलैंड की संस्था 'बेटर कॉटन इनिशिएटिव' के मानदंडों के आधार पर चलाई है। अब चीन ऐसा अपना मानदंड लागू करेगा।

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बीजिंग स्थित कॉटन सर्विस प्रोवाइडर कंपनी झोंगनोंग गुओजी ने इस दिशा में प्रयास दो साल पहले शुरू किया था। लेकिन तब वो कोशिश रफ्तार नहीं पकड़ पाई थी। उसने अपने प्रोजेक्ट का नाम 'वेलई कॉटन' (भावी कॉटन) रखा है। लेकिन अब इसमें ताकत झोंकी जा रही है। अब इसमें सरकारी सहायता से चलने वाले संगठन 'चाइना फैशन एसोसिएशन' और 'मॉडर्न सीड्स डेवलपमेंट फंड' भी शामिल हो गए हैँ।

स्विट्जरलैंड स्थित बेटर कॉटन इनिशिएटिव की शुरुआत 2009 में हुई थी। उसका मकसद कॉटन उद्योग में अच्छे व्यवहार को बढ़ावा देना है। फिलहाल, ये संस्था चीन में निशाने पर है। वेईलाई कॉटन प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर झाओ यान ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘हम वर्षों से स्विट्जरलैंड के मानदंडों के मुताबिक चल रहे हैँ। लेकिन उस देश में कॉटन का उत्पादन तक नहीं होता है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम अपना राष्ट्रीय मानक तैयार करें।’ झाओ को इस प्रोजेक्ट का चीफ ब्रांड ऑफिसर बनाया गया है। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि हाल में शिनजियांग में तैयार कॉटन के खिलाफ भड़के अंतरराष्ट्रीय विरोध से उनकी परियोजना की गति तेज हुई है।
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पिछले महीने बेटर कॉटन इनिशिएटिव ने जबरिया मजदूरी के आरोप में शिनजियांग में तैयार कॉटन को लाइसेंस देना रोक दिया था। लेकिन जनवरी 2020 में इसी संस्था ने यूरोप में कॉटन उद्योग की पत्रिका एपेरल इनसाइडर से कहा था कि उसकी या किसी तीसरे पक्ष की जांच से ये साबित नहीं हुआ है कि बेटर कॉटन इनिशिएटिव की देखरेख में शिनजियांग में चल रहे उद्योगों में जबरिया मजदूरी ली जाती है। तब संस्था ने कहा था कि ऐसे कोई सबूत सामने नहीं आए हैं। यहां तक कि पिछले महीने ही बेटर कॉटन इनिशिएटिव की शंघाई शाखा के प्रमुख ने चीन के टीवी चैनल सीसीटीवी से बातचीत में कहा था कि उनकी संस्था को कभी जबरिया मजदरी के सबूत हाथ नहीं लगे।

इसलिए अब ये आरोप लगा है कि इस संस्था ने राजनीतिक कारणों से शिनजियांग के कॉटन उत्पादों को लाइसेंस देने की अपनी गतिविधि रोकी है। लेकिन चीनी अधिकारी ये नहीं मानते कि चीन का अपना मानक तैयार करने की कोशिश स्विट्जरलैंड की संस्था का जवाब है।

शिनजियांग डिजिटल कॉटन रिसर्च सेंटर के महासचिव लुओ यान ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘इस प्रयास के जरिए हम शिनजियांग के कॉटन की क्वॉलिटी सुधारना चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि यहां के कॉटन की क्वॉलिटी अमेरिकी या ऑस्ट्रेलियाई कॉटन जितनी अच्छी नहीं है।’

वेईलाई कॉटन ने शिनजियांग से 32 सदस्यों को अपनी परियोजना में शामिल किया है। उनके अलावा देसी फैशन उद्योग के कुछ प्रतिनिधि भी इसमें रखे गए हैं। लुओ ने बताया कि इस पहल के लिए चीन सरकार से सब्सिडी मिल रही है।

स्विस संस्था के लाइसेंस देना रोकने के बाद स्वीडन की कंपनी एचएंडएम ने शिनजियांग में तैयार कॉटन का इस्तेमाल रोकने का एलान किया था। खेल सामग्रियों की निर्माता अमेरिकी नाइकी ने भी कहा है कि वह अब शिनजियांग में बने उत्पादों का उपयोग नहीं करेगी। कुछ अन्य कंपनियों ने भी ऐसे कदम उठाए हैं। इसके खिलाफ हाल में चीन काफी गुस्सा भड़का है।

एचएंडएम, नाइकी, बर्बेरी, एडिडास, उनिक्लो आदि जैसी कंपनियों के उत्पादों के बहिष्कार की चीन में तेज मुहिम चली है। उधर चीनी कंपनियों एन्टा, ली-निंग और फाइला ने कह है कि वे बेटर कॉटन इनिशिएटिव से अपना नाता तोड़ रही हैं। अब जाहिर है, चीनी कंपनियां वेईलाई कॉटन प्रोजेक्ट का हिस्सा बनेंगी। इससे दुनिया का कॉटन उद्योग अब मानदंडों के मामले में दो भागों में बंट जाएगा।

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