अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही भड़कता तनाव अब एक नए और खतरनाक आर्थिक मोर्चे पर पहुंच गया है। इसका कारण अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की चौंकाने वाली रिपोर्ट है, जिसनें वैश्विक शक्ति संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन और ईरान मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे अमेरिका की पकड़ कमजोर कर सकें और अमेरिका पर रणनीतिक बढ़त भी हासिल कर सकें।
रिपोर्ट की माने तो सप्लाई चेन को दबाव का औजार बनाकर, ऊर्जा और जरूरी संसाधनों पर नियंत्रण की यह जंग अब सीधे-सीधे आर्थिक युद्ध में बदलती दिख रही है। ऐसे में इस साइलेंट वॉर ने दुनिया भर में कीमतें, सप्लाई और सुरक्षा सब कुछ हिला कर रख दिया है।
चीन ने किस चिज का निर्यात सीमित किया?
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पिछले साल अमेरिका को रेयर अर्थ मटेरियल्स का निर्यात सीमित कर दिया था, जो इलेक्ट्रॉनिक और सैन्य उपकरणों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। वहीं ईरान पर आरोप है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण या बाधा पैदा करके वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित किया, जिससे दुनिया भर में तेल महंगा हो गया। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका कभी आर्थिक दबाव में सबसे मजबूत देश माना जाता था, क्योंकि वह डॉलर सिस्टम और तकनीक तक पहुंच रोककर देशों पर दबाव बनाता था। लेकिन अब चीन और ईरान जैसे देश भी इसी तरह की रणनीति अपना रहे हैं।
ये भी पढ़ें:- 'टोल देकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को रोकेंगे': वार्ता विफल होने पर भड़के ट्रंप, नाकेबंदी का किया एलान
क्या अमेरिकी वित्त विभाग ने सही आकलन नहीं किया?
अमेरिकी सीनेटर रॉन वाइडन के हवाले से कहा गया कि अमेरिकी वित्त विभाग ने युद्ध से पहले ऊर्जा बाजार पर संभावित असर का सही आकलन नहीं किया था, जिससे तैयारियों की कमी दिखी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन तनाव के दौरान यह साफ हो गया कि वैश्विक सप्लाई चेन अब देशों के लिए बड़ा दबाव का हथियार बन चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब दुनिया के देश अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं ताकि बाहरी देशों पर निर्भरता कम हो सके।
मार्को रुबियो ने क्यों जताई चिंता?
दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस विषय पर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अगर सप्लाई चेन में विविधता नहीं लाई गई, तो अमेरिका की विदेश नीति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जब चीन ने प्रतिबंध लगाए और ईरान ने समुद्री मार्गों पर दबाव बनाया, तो अमेरिका को अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
ये भी पढ़ें:- पश्चिम एशिया संकट: पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर की बात, कहा- हम मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं
समझिए सप्लाई चेन नियंत्रण सबसे बड़ा भू-राजनीतिक हथियार कैसे?
विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि अब दुनिया में कोई भी देश पूरी तरह से चोक पॉइंट्स पर नियंत्रण नहीं रखता। दूसरी ओर ईरान के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता से सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की चीजें जैसे प्लास्टिक, उर्वरक, खाद्य पदार्थ और अन्य जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो रही हैं, जिसका असर आम लोगों तक पहुंच रहा है। कुल मिलाकर रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां आर्थिक ताकत और सप्लाई चेन नियंत्रण ही सबसे बड़ा भू-राजनीतिक हथियार बन गया है।