जानकारी के मुताबिक जांच के दौरान पता चला कि इस माइक्रोचिप से लगभग 30 कंपनियां प्रभावित हुई हैं। इनमें मुख्य बैंक, सरकारी ठेकेदार और दुनिया की सबसे कीमती कंपनी एपल भी शामिल है।
अमेजन ने ईमेल के द्वारा दिए गए अपने बयान में कहा है कि अमेजन वेब सर्विसेज को इस बारे मे पहले से कोई जानकारी नहीं थी। एपल की ओर से कहा गया कि इस मामले में एक बात बिल्कुल साफ है कि एपल को किसी भी सर्वर में नुकसान पहुंचाने वाली कोई चिप नहीं मिली है।
वहीं, सुपरमाइक्रो के प्रवक्ता पेरी हेज ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी जांच के बारे में जानकारी नहीं है। इस मामले में चीन की सरकार की ओर से कोई सीधा बयान नहीं आया है। हालांकि यह जरूर कहा गया है कि साइबर क्षेत्र में सप्लाई चेन सुरक्षा चिंता का आम विषय है. चीन भी इससे पीड़ित रहा है।
आमतौर पर साइबर हमले सॉफ्टवेयर पर आधारित होते हैं। हार्डवेयर आधारित साइबर हमले आमतौर पर नहीं होते क्योंकि यह बहुत कठिन होता है। लेकिन, हार्डवेयर हमला लंबे समय तक प्रभावित करने वाला होता है, इसलिए भी जासूसी एजेंसियां इसमें अरबों डॉलर तक लगाने से पीछे नहीं हट रही हैं।