वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ समय पहले चीन ने शंघाई और शेनझेंन शेयर बाजारों में अमेरिका के नैसडैक की तरह की लिस्टिंग प्रक्रिया लागू की थी। उसका मकसद भी नई टेक कंपनियों को धन जुटाने की सुविधा देना था। जानकारों का कहना है कि चीन वैसी कंपनियों को तरजीह दे रहा है, जो सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। बीजिंग स्टॉक एक्सचेंज से इस मकसद को लेकर बनने वाली नई कंपनियों को मदद मिल सकती है।
जानकारों के मुताबिक नए स्टॉक एक्सचेंज का एक और मकसद सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देना हो सकता है। चीन का सेवा क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में काफी छोटा है। लेकिन गुजरे वर्षों में पर्यटन और तकनीक केंद्रित सेवाओं के उपयोग में बढ़ोतरी होने से सर्विस सेक्टर में नए उद्यम स्थापित हुए हैं। कोरोना महामारी आने के पहले चीन का सर्विस सेक्टर 838 अरब डॉलर मूल्य का हो चुका था। लेकिन 2020 में महामारी के कारण इसमें भारी गिरावट आई। फिलहाल, चीन की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग के कुल कारोबार के 14 फीसदी के बराबर ही है।
बीते एक साल में चीन के शेयर बाजारों में विदेशी कंपनियों का निवेश बढ़ा है। इसकी एक वजह चीन का अपने वित्तीय क्षेत्र को अधिक उदार बनाना है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन सरकार इस निवेश का लाभ छोटे कारोबारियों तक पहुंचाना चाहती है। अब यह देखने की बात होगी कि नए स्टॉक एक्सचेंज की स्थपना से उसका ये मकसद किस हद तक पूरा होता है।