एक समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के मामले में अमेरिका की बढ़त किसी दूसरे देश की पहुंच से बाहर मानी जाती थी, लेकिन अब चीन का उससे कुछ वर्षों का ही अंतर रह गया है। यानी अमेरिका इस मामले में और तेजी से आगे नहीं बढ़ता है, तो चीन उसे पीछे छोड़ सकता है। ये चेतावनी अमेरिकी कांग्रेस (संसद) और व्हाइट हाउस को सौंपी गई एक रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली समिति की अध्यक्षता गूगल के पूर्व सीईओ एरिक शमिड्ट ने की। रिपोर्ट सौंपने के बाद उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका प्रमुख तकनीकों में भारी निवेश करने और उनमें एआई को पूरी तरह शामिल करने में नकाम रहा, तो उसके लिए इसके खतरनाक नतीजे होंगे। समिति ने इस मामले में अमेरिका सरकार से आगे आने और जरूरी कदम उठाने को कहा है।
समिति की इस 750 पेज की रिपोर्ट को नेशनल सिक्युरिटी कमीशन ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने तैयार किया है। 15 सदस्यीय इस समिति को इस काम में दो साल लगे। समिति के सदस्यों में माइक्रोसॉफ्ट के एरिक हॉर्वित्ज, अमेजन के एंडी जेसी और ऑरेकल कंपनी के साफ्रा कैट्ज भी शामिल थे।
समिति इस नतीजे पर पहुंची है कि आर्थिक और सैनिक दोनों मोर्चों पर अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन है। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘अगर मौजूदा रुझान नहीं बदले तो चीन के पास इतनी ताकत, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा है कि वह अगले दशक में अमेरिका को एआई के क्षेत्र में पीछे छोड़ दे।’ समिति के मुताबिक अमेरिका के सामने सिर्फ एआई में ही आगे बने रहने की चुनौती नहीं है। बल्कि क्वांटम कंप्यूटिंग, रॉबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, और 5जी के मामले में भी उसके सामने यही चुनौती है।
श्मिड्ट ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा, ‘हमें चीन से युद्ध करने की जरूरत नहीं है। हमें शीत युद्ध छेड़ने की भी जरूरत नहीं है। जरूरत इस बात की है हम प्रतिस्पर्धा में टिके रहें।’ समिति ने कहा है कि ऐसे हथियार बनाने की जरूरत है, जो एआई से संचालित हों। हालांकि इसके साथ यह शर्त होनी चाहिए कि वे हथियार मनुष्य के निर्देश के बाद ही हमला करें। कंप्यूटर विजन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें एआई सेना के लिए तुरंत मददगार हो सकता है। श्मिड्ट के मुताबिक यह सही सोच नहीं है कि ड्रोन और उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण सिर्फ मनुष्य करें। कंप्यूटर इस काम को मनुष्य से बेहतर ढंग से कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि अभी निर्णय प्रक्रिया में एआई सिस्टम से सहायता पाने की उम्मीद ठीक नहीं है। ऐसा होने में अभी कई और वर्ष लगेंगे।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि अमेरिका सेमीकंडक्टरों के उत्पादन में चीन से दो पीढ़ियों का फर्क बनाए रखे। हाल का अनुभव यह है कि यह फर्क घटता गया है। जानकारों के मुताबिक अमेरिका में इंटेल अकेली ऐसी कंपनी है, जिसने मैनुफैक्चरिंग तकनीक पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। लेकिन उसे भी दक्षिण कोरिया की सैमसंग और ताइवान की टीएसमसी से कड़ी चुनौती मिल रही है। इसलिए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इस क्षेत्र में अनुसंधान के लिए अमेरिका को हर साल बजट बढ़ाना चाहिए और इसे सालाना 32 अरब डॉलर तक ले जाना चाहिए।
चीन तकनीक के कई क्षेत्रों में आगे निकल चुका है। इनमें चेहरे की पहचान (फेशियल रिकॉग्निशन) और पेमेंट (भुगतान) टेक्नोलॉजी शामिल हैं। श्मिड्ट ने स्वीकार किया कि ई-कॉमर्स और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के क्षेत्रों में चीन पांच की बढ़त बना चुका है। उन्होंने कहा कि चीन से आ रही प्रतिस्पर्धा अच्छी बात साबित हो सकती है अगर अमेरिका सरकार इन क्षेत्रों में आविष्कार और विकास के लिए धन बढ़ाए। वरना, चीन दूसरे क्षेत्रों में भी अपनी बढ़त बना लेगा।